
हल्द्वानी। दुकानों के आगे अतिक्रमण से मंडी बदसूरत होती जा रही है। मंडी परिसर में जब चाहे रातों रात ‘अवैध’ निर्माण हो जाता है, बावजूद मंडी प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।
कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने हल्द्वानी में वर्ष 1982 में नवीन मंडी स्थापित की थी। थोक व्यवसायियों की डिमांड पर समय-समय पर इसमें दुकानों का निर्माण होने के बाद दुकानों की कुल संख्या करीब सवा चार सौ पहुंच गई है। मंडी में 213 दुकानें हायर परचेज की यानी कि 90 साल की लीज वाली हैं जबकि 97 दुकानें स्ववित्तपोषित योजना की हैं। ये दुकानें व्यवसायियों से दुकान कीमत अग्रिम भुगतान लेकर किया गया। इसके अलावा 97 दुकानें ऐसी हैं जो किराए पर चल रही हैं। साथ ही दस दुकानें किसान बाजार की हैं। ए, बी, सी ब्लाकों में बनी इन दुकानों के आगे काश्तकार की सुविधा के लिए चबूतरे का निर्माण किया गया था, लेकिन अधिकांश दुकानों के आगे के चबूतरों को मंडी समिति ने टीनशेड की अनुमति देकर उनका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया है। दुकानदारों ने पहले टीनशेड का निर्माण किया और फिर उन्हें कवर करवाकर उनमें चैनल लगवा लिए। इतना ही नहीं कई दुकानदारों ने तो दुकानों के आगे रातों-रात अवैध निर्माण कर लिया है। मंडी का हाल यह हो गया है कि जिस दुकानदार को मौका मिल रहा है, वे अपने आसपास की जगह पर अतिक्रमण कर ले रहा है।
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मंडी में दुकानों के आगे अतिक्रमण को चिह्नित करने का सर्वे कराया गया है। सर्वे में अधिकांश दुकानों में अतिक्रमण होने की बात सामने आई है। बड़ी संख्या में दुकानों में अवैध निर्माण को हटाने के लिए किस तरह कार्रवाई की जाए, इस पर विचार किया जाएगा।
-विनोद कुमार लोहुमी, सचिव, मंडी समिति हल्द्वानी
