नई पीढ़ी नहीं जानती चांदी का ‘ठोका’

चौखुटिया। हाथ में पहने जाने वाला चांदी का ठोका अब दिखना दुर्लभ हो गया है। नई पीढ़ी के युवा तो दूर आज के स्वर्णकारों को भी इसके बारे बहुत कम जानकारी है। अधिकांश लोगों ने तो इसका नाम तक नहीं सुना है।
ठोका चांदी में नक्काशी कर बनाया जाने वाला गहना है, जो गिलास के आकार का होता है। इसके एक भाग में कील की तरह मोटा तार खांचे में लगा होता है। जिसको खींचने पर यह बीच में से खुल जाता है। इससे इसको पहनने में आसानी होती है। इसकी नक्काशी आकर्षक होती है। स्वर्णकार ख्याली लाल वर्मा ने बताया कि उनके पिता चांदी का ठोका भी बनाते थे। इसे गढ़वाल में ज्यादा पहना जाता था। आम तौर पर इसमें नग नहीं लगाए जाते हैं।
इसका वजन पांच सौ ग्राम से एक किलो तक होता था। इस आभूषण का प्रचलन कई साल पहले ही बंद हो चुका है। इस तरह के आभूषण बनाने वाले बुजुर्ग स्वर्णकार भी अब नहीं रहे।

Related posts