
वाशिंगटन: अमेरिका ने माना है कि हाल ही में विदेशी नेताओं के इंटरनेट और फोन की निगरानी से जुड़ी एनएसए की जानकारी के खुलासे की वजह से उसके कुछ सहयोगी देशों के साथ संबंधों में तनाव आ गया है, लेकिन वाशिंगटन का यह भी कहना है कि खुद को और अपने सहयोगियों को सुरक्षित रखने की जरूरत के मद्देनजर वह सूचनाएं जुटाना जारी रखेगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की उप प्रवक्ता जेन साकी ने कहा, ‘‘सवाल यह नहीं है कि गोपनीय सूचना के खुलासे से हमारे कुछ सहयोगियों के साथ हमारे संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। हम इन सहयोगियों के साथ चर्चा कर रहे हैं। यह चर्चाएं जारी रहेंगी। जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने आगामी सप्ताहों में यहां आने की पुष्टि की है। इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले सप्ताह भी विदेश मंत्री की यात्रा में इस मुद्दे पर फ्रांस के साथ चर्चा की गई और इटली से भी बात की गई।’’ साकी ने कहा कि गोपनीय सूचनाओं के खुलासे की वजह से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की बहुत आलोचना की गई और तनाव का एक कारण यह भी था। इसके कारण हमारे कुछ सहयोगियों के साथ हमारे रिश्तों में तनाव आ गया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सरकार को उसकी निगरानी क्षमताओं की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। साकी ने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम सूचनाएं इसलिए जुटा रहे हैं, क्योंकि हमें ऐसा करने की जरूरत है न कि इसलिए कि हम ऐसा कर सकते हैं।’’
इस बीच एएफपी की एक खबर के अनुसार, राजनयिकों ने बताया कि अमेरिका द्वारा दूसरे देशों के बारे में खुफिया तरीके से जानकारी जुटाए जाने के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नाराजगी जाहिर करने के लिए जर्मनी और ब्राजील संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में अमेरिका का ही नाम नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसके जरिए नागरिक और राजनैतिक अधिकारों के अंतरराष्ट्रीय नियम पत्र का दायरा विस्तृत कर इसमें इंटरनेट गतिविधियां शामिल करने की अपील की जाएगी। पहचान गुप्त रखने की शर्त पर वार्ताओं में शामिल संयुक्त राष्ट्र के एक राजनीतिज्ञ ने कहा, ‘‘जर्मन और ब्राजील के राजनयिकों ने आज प्रस्ताव के मसौदे पर चर्चा के लिए यूरोपीय और लातिन अमेरिकी समकक्षों के साथ मुलाकात की।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य व्यवस्था का उल्ंलघन करने वालों को एक संदेश देना है।’’
