
आने वाले दिनों में अगर नेता आपको समर्थन के लिए अपने रैली में बुलाएं और अपनी ही पार्टी का झंडा लगाकर आने से मना कर दें तो चौंकिएगा नहीं।
यह चुनाव आयोग की सख्ती का असर है।
आयोग ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति चुनावी रैली में निजी कार पर भी पार्टी का झंडा या पोस्टर लगाकर आता है तो उस वाहन का खर्च उम्मीदवार के चुनावी खर्च में जुड़ जाएगा।
रैली व सभाओं के लिए पहली बार चुनाव आयोग ने यह नया नियम लागू किया है।
इस बारे में सभी राजनीतिक दलों को जानकारी दे दी गई है। निजी कार में झंडा या बैनर लगाने पर उसका खर्च बाजार दर के हिसाब से जोड़ा जाएगा।
उम्मीदवारों को अब प्रचार के लिए आयोजित होने वाली रैली की मंजूरी के साथ ही उसमें होने वाले सभी खर्च का ब्यौरा देना होगा।
यानी टेंट, कुर्सी व माइक से लेकर सभी पर हुआ खर्च बाजार दर के हिसाब से देना होगा।
फिलहाल यह दर तय होनी बाकी है। इसके बाद चुनाव आयोग की टीम भी मौके का जायजा लेगी। पूरी रैली की वीडियोग्राफी भी होगी।
