
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए ग्रामीणों ने अपने चुनावी मुद्दे तैयार किए हैं।
उन्होंने वर्षों से छाए पेयजल संकट के साथ मेट्रो और लचर बस सेवा को चुनाव मुद्दा बनाया है।
अगले माह गांवों में वोट मांगने के लिए आने वाले उम्मीदवारों के सामने वे अपनी मांग पूरी करने की शर्त रखेंगे।
दिल्ली के नरेला, बवाना, मुंडका, किराड़ी विकासपुरी, मटियाला, नजफगढ़, पालम, बिजवासन आदि विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस, भाजपा, आप और अन्य दलों के मुद्दों से मतदाताओं को खास लेना-देना नहीं होगा।
ग्रामीणों ने इन सब बातों से खुद को दूर कर राजनीतिक दलों के सामने अपनी प्राथमिकता रखने की तैयारी की है।
चौगामा विकास समिति के महासचिव विजेंद्र सिंह ने बताया कि इलाके की एक दर्जन से अधिक समितियों के पदाधिकारी उम्मीदवारों से ग्रामीण क्षेत्र की लचर परिवहन सेवा को लेकर सवाल-जवाब करेंगे।
उनसे परिवहन सेवा में सुधार के बारे में पूछा जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रात में नहीं, दिन में भी में परिवहन सेवा बहुत खराब है।
बसों के इंतजार में एक-एक घंटे तक लोग सड़कों पर खड़े रहते हैं।
डाबर विकास समिति के पदाधिकारी सतबीर यादव कहते हैं कि पूरी दिल्ली में मेट्रो चल रही है, लेकिन ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के लोग मेट्रो से महरूम हैं।
सतबीर का कहना है कि जो मेट्रो देगा, उसी को लोग वोट देंगे। उनकी समिति में चार दर्जन से अधिक गांवों के लोग शामिल हैं।
छावला ग्राम सुधार समिति के अध्यक्ष बलवान सोलंकी ने बताया कि उनके इलाके में पेयजल संकट प्रमुख चुनावी मुद्दा होगा। करीब दो दशक से लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।
हर बार चुनावों में उम्मीदवारों का ध्यान इस समस्या की ओर खींचते हैं, मगर आज तक गंभीर पहल नहीं हुई।
इस बार उम्मीदवारों से पेयजल संकट दूर करने की रूपरेखा के बारे में जानकारी ली जाएगी। इस बारे में महिलाएं अगुवाई करेंगी।
