
कुल्लू। लंका दहन की रस्में पूरी होने के बाद जिला से आए देवी-देवता अपने देवालयों को वापस लौट गए हैं। उत्सव की शोभा बढ़ाने आए जिला के देवी-देवताओं ने रविवार को लंका पर चढ़ाई कर रघुनाथ यात्रा में भाग लेने के बाद देवालयों की ओर कूच कर दिया। लिहाजा, सात दिन तक तपोवन में तबदील रहने वाली कुल्लूत प्रदेश की नगरी देवी-देवताओं के बिना सूनी पड़ गई है। सात दिन तक खुले आसमान तले तपस्वी की जिंदगी बिताकर देवता के कारकून और देवलुओं ने अपने अधिष्ठाता के साथ घर वापसी कर दी है।
200 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर कुल्लू पहुंचे बाह्य सराज के अधिष्ठाता और सबसे अमीर देवता खुडीजल सहित टकरासी नाग, चोतरू नाग, ब्यास ऋषि, कोट पुझारी, निरमंड के सप्त ऋषि, देवी दुराह, देवता चंभु ने भी देवालयों की ओर प्रस्थान कर दिया है। देवलुओं के कंधों पर सवार होकर लौटे सराज घाटी के देवता करीब एक सप्ताह बाद अपने देवालय पहुंचेंगे। बंजार, मनाली, गड़सा, सैंज और मणिकर्ण घाटी के देवी-देवता अगले दो से चार दिन में अपने देवालय में विराजमान हो जाएंगे। सोने-चांदी के आभूषणों से लदे इन देव रथों की घर रवानगी से ढालपुर सुना पड़ गया है। अब लोगों को देवताओं के दर्शन के लिए एक साल का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। देवता खुडीजल के कारदार शेर सिंह ने कहा कि बाह्य सराज के सभी देवता अपने देवालयों को निकल पड़े हैं। उन्होंने कहा कि रास्ता लंबा होने से देवता अगले एक से डेढ़ सप्ताह में अपने-अपने मंदिर पहुंच जाएंगे।
