जाटों ने मांगों पर बुलंद की आवाज

मैहतपुर (ऊना)। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष रिटायर्ड कैप्टन मदन लाल हीर ने कहा है कि सियासी दलों अथवा नेताओं की आपसी जंग महज कुर्सी पाने तक सीमित हो गई है। जबकि आम जनता के हितों और समस्याओं की अनदेखी हो रही है।
रविवार को देहलां में आयोजित बैठक में कैप्टन हीर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जाट आरक्षण के लिए एक अर्से से मांग उठा रहे हैं, लेकिन न तो सूबे की सरकार ने उनके हक में केंद्र के समक्ष उनका पक्ष रखा है, न ही केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई नीति तय की है। कहा कि पिछले कई सालों से केंद्र सरकार को आंदोलनों के जरिये चेताया जा रहा है, मगर ऐसा लगता है कि सियासी दलों को अन्य तबकों की ताकत का कोई ख्याल ही नहीं है। हीर ने कहा कि प्रदेश के जाट समुदाय में राज्य एवं केंद्र सरकार के प्रति गहरा रोष है। यह रोष आम चुनावों में भी दिखाई दे सकता है। जिला अध्यक्ष ने कहा कि जाटों को आरक्षण का प्रावधान अंग्रेजी हुकूमत के वक्त भी मिला हुआ था। एक ओर तो जाटों को पिछड़ा जानकार ओबीसी वर्ग में शामिल कर दिया गया, लेकिन आरक्षण का आज तक कोई प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अथवा भाजपा को जनता के हितों के लिए नीतियां तय करने में अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल करना चाहिए।
बैठक में पूर्व प्रधान उजागर सिंह, जीत सिंह, ओबीसी सैल के प्रधान तारा सिंह नेगी, कांग्रेस नेता गुरप्रताप लाली, पूर्व प्रधान चरण कौर, डा. सरवण सिंह, राममूर्ति, बीडीसी उपाध्यक्ष गुरनैव सिंह, जिला परिषद के उपाध्यक्ष अवतार सिंह, किसान मोर्चा के तेलूराम अटवाल, सुरेन्द्र सिंह, सुरजीत सिंह, दिलबाग सिंह, लंबरदार गुरचरण सिंह, रामकृष्ण समेत कई अन्य लोग मौजूद रहे।

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