
केलांग (लाहौल-स्पीति)। सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण निर्माणाधीन रोहतांग टनल का एक हिस्सा धंस गया है। वीरवार को टनल के ऊपर का करीब तीस मीटर हिस्सा अचानक नीचे आ गिरा। इस घटना से हालांकि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ लेकिन सुरक्षा के दृष्टिगत नॉर्थ पोर्टल की ओर से टनल का काम बंद कर दिया गया है। इसी बीच, बीआरओ और टनल को बना रही कंपनी के डिजाइन विंग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। बीआरओ के अतिरिक्त कार्यकारी अभियंता अंबिषेक मिश्रा ने टनल का एक हिस्सा धंसने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि घटना के बाद टनल के भीतर से मलबा बाहर निकालने का कार्य शुरू कर दिया है।
लाहौल एवं मनाली के बीच रोहतांग दर्रे के नीचे से 8.9 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है। वर्ष 2011 से इसका काम शुरू हुआ है। मनाली और लाहौल दोनों ओर से टनल का काम चल रहा है। अभी तक करीब सवा चार किलोमीटर टनल की खुदाई हो चुकी है। बीआरओ की देखरेख में अफ्कॉन-स्ट्राबैग कंपनी इस टनल को बना रही है। सूत्रों के अनुसार वीरवार को नार्थ पोर्टल की ओर से करीब 1900 मीटर अंदर टनल का एक हिस्सा अचानक ऊपर से धंस गया। उस समय करीब एक दर्जन मजदूर अंदर काम कर रहे थे, उन्हें किसी तरह से बचा लिया गया। कंपनी एवं बीरआरओ के एक्सपर्ट टनल धंसने के कारणों की जांच में जुट गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को भी कंपनी और बीआरओ के अधिकारियों की आपात बैठक हुई है। बीते साल भी टनल के भीतर करीब 100 मीटर दीवार में दरार आ गई थी, हालांकि इसे बाद में दुरस्त कर दिया गया। पानी रिसने के कारण साउथ पोर्टल में भी टनल का निर्माण कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।
इनसेट-1
सामरिक महत्त्व है टनल का
समुद्र की सतह से करीब 2100 मीटर ऊंचाई पर बन रही रोहतांग टनल सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। इसके बनने से लद्दाख से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सैनिकों को बारह महीने आसानी से रसद पहुंचाई जा सकेगी। रोहतांग दर्रे के कारण अभी मनाली-लेह मार्ग साल में छह माह बंद रहता है। इसके अलावा लाहौल और पांगी-किलाड क्षेत्र भी पूरा साल देश के अन्य क्षेत्रों से जुड़े रहेंगे। टनल निर्माण में 2 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है।
