
उत्तरप्रदेश और बिहार की पुलिस इलाके को लेकर आपस में लड़ती रहीं और पत्नी की बेरहमी से हत्या करने का आरोपी सीआईएसएफ का जवान कोर्ट से छूट गया।
दिल्ली पुलिस के आग्रह पर आरोपी को दो बार न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
दिल्ली पुलिस ने जवान की गिरफ्तारी की जानकारी यूपी व बिहार पुलिस को दी थी लेकिन दोनों राज्यों की पुलिस ने इलाका नहीं होने का हवाला देकर आरोपी की कस्टडी लेने से मना कर दिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साकेत कोर्ट ने यूपी व बिहार के डीजीपी को पत्र लिखा है।
पुलिस के अनुसार, सीजीओ कांप्लेक्स स्थित सीआईएसएफ के हेडक्वार्टर से सितंबर के आखिरी सप्ताह में सूचना मिली थी कि गांव भाकना खुर्द, अमृतसर (पंजाब) निवासी जवान अमृतपाल सिंह ने पत्नी की हत्या के बाद हेडक्वार्टर में सरेंडर किया है।
लोधी कॉलोनी पुलिस ने अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। उसने खुलासा किया था कि उसकी पत्नी के किसी अन्य से संबंध थे।
उसने 25 सितंबर को डिब्रूगढ़-अमृतसर एक्सप्रेस के एस-1 कोच के बाथरूम में पत्नी की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी।
उत्तर प्रदेश की गाजीपुर जीआरपी थाना पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर महिला के शव की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दी थी।
दिल्ली पुलिस ने जब गाजीपुर जीआरपी को सूचना दी तो उनका कहना था कि आईपीसी की धारा 302 और 201 के तहत जीरो एफआईआर दर्ज कर बिहार के बरौनी जीआरपी पुलिस को मामला सौंप दिया गया है।
सिपाही ने हत्या बरौनी में की है। इसके बाद जब दिल्ली पुलिस ने बरौनी पुलिस से संपर्क किया तो उनका कहना था कि उनके इलाके में कोई हत्या नहीं हुई और न ही उन्हें कोई जीरो एफआईआर मिली है।
दिल्ली पुलिस ने दोनों थानों को वायरलेस, फैक्स और ई-मेल से जानकारी दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सिपाही की दूसरी न्यायिक हिरासत 10 अक्तूबर को खत्म हो गई थी। फिलहाल साकेत कोर्ट ने सिपाही को रिलीज कर दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि जरूरत के हिसाब से उसे फिर गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
