
हमीरपुर। सरकार ने भले ही न्यूनतम किराये में कटौती की हो लेकिन 30 फीसदी किराये में एकमुश्त बढ़ोतरी अभी भी लोगों को अखर रही है। नियमित और लंबा सफर करने वालों की जेब पर अधिक भार पड़ रहा है। बसों में सवारियों के साथ बहस के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। जनता सरकार से मांग कर रही है और उम्मीद जता रही है कि सरकार किराये में बढ़ोतरी को वापस लेगी।
दियोटसिद्ध में बैंक में कार्यरत हमीरपुर निवासी विजय कु मार का कहना है कि 30 फीसदी बढ़ोतरी काफी अधिक है। सरकार का निर्णय जनता के हित में नहीं कहा जा सकता। प्रतिमाह जेब पर भार बढ़ा है।
विद्युत बोर्ड से सेवानिवृत्त अमर सिंह का कहना है कि सरकार को न्यूनतम किराये की भांति सामान्य किराये में की गई बढ़ोतरी को भी वापस लेना चाहिए। या 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी करनी चाहिए।
दूरसंचार निगम से सेवानिवृत्त ज्ञानचंद का कहना है कि सरकार ने न्यूनतम किराये में कमी कर कम दूरी का सफर करने वालों को राहत प्रदान की है, लेकिन लंबी दूरी का सफर करने वालों को बढ़ोतरी भारी पड़ रही है। कहीं घूमने कार्यक्रम बनाना हो तो पहले सोचना पड़ता है।
किसान प्रीतम चंद का कहना है कि सरकार ने किराये में अचानक काफी अधिक बढ़ोतरी की है। आम आदमी के लिए 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी को सहन कर पाना आसान नहीं है।
गलोड़ में कार्यरत हमीरपुर के सुनील कुमार, राजिंद्र कुमार, चुनियाड़ गांव निवासी बलदेव सिंह का कहना है कि 30 फीसदी किराये में बढ़ोतरी अधिक है। सरकार को बढ़ोतरी को वापस लेना चाहिए या फिर प्रतिशतता को घटाना चाहिए। शिक्षा उपनिदेशक पद से सेवानिवृत्त ब्रह्मदास, धनेड़ निवासी बलदेव ठाकुर, भरेड़ी के आशीष कुमार का कहना है कि सरकार को जनता का भी ख्याल रखना चाहिए। लंबी दूरी पर अधिक मार पड़ रही है। नादौन से शिमला के सफर में किराये में एकदम 60 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे ही अन्य स्थानों के लिए अधिक पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।
