जिले में एक अग्निशमन केंद्र, तहसीलें भगवान भरोसे

बागेश्वर। नवरात्र और दीपावली नजदीक है और बारिश थमने के बाद आग की घटनाओं की आशंका रहती है। ऐसे में अग्निशमन केंद्रों की भूमिका अहम होती है, लेकिन इस जिले में जिला मुख्यालय को छोड़कर कहीं भी अग्निशमन केंद्र नहीं हैं। जिले में अब पांच तहसीलें हो गई हैं। एक उप तहसील भी है। किंतु इन नव सृजित तहसीलोें में कहीं भी दमकल नहीं है। जिला मुख्यालय से इन तहसीलों की दूरी 24 से 60 किमी तक है। ऐसी हालत में सुदूरवर्ती क्षेत्रों की अग्नि सुरक्षा भगवान भरोसे है।
जिले में बागेश्वर, गरुड़, कपकोट, कांडा, दुग नाकुरी तहसीलें हैं। इसके अलावा काफलीगैर उपतहसील भी है। बावजूद इन तहसीलाें में अग्नि दुर्घटनाओं से बचने के कोई ठोस उपाय नहीं हैं। वहां आग की दुर्घटना होने पर जिला मुख्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है। जब तक जिला मुख्यालय से तहसील मुख्यालयों तक अग्निशमन वाहन जाते हैं। तब तक सब कुछ स्वाहा हो जाता है। जिला मुख्यालय स्थित अग्निशमन केंद्र में दो बड़े वाहन हैं। जिनकी क्षमता दो हजार से 2400 लीटर की है। यहां चार हाईड्रेंट हैं। जो गोमती पुल, सरयू पुल, नुमाइशखेत और कत्यूर बाजार में स्थित हैं। इनमें से कत्यूर बाजार वाला खराब है। अब बकरीद, नवरात्र और दीपावली त्यौहार आने वाले हैं। इन त्यौहारों में अग्निकांड की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में तहसील मुख्यालयों में अग्निशमन केंद्र नहीं होना लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। अग्निशमन केंद्र प्रभारी किशोर राम ने कहा कि उनके केंद्र में वाहन और कर्मचारियों की कमी नहीं है। त्यौहारों पर अतिरिक्त ऐहतियात बरती जाती है।

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