नदियों के मायके में पसरा है अंधेरा

केलांग। हाईडल प्रोजेक्टों के जरिये लाखों घरों को रोशन कर रही प्रदेश की नदियों के मायके के एक हिस्से में अभी भी अंधेरा पसरा हुआ है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि यहां कई बार अस्पतालों में डिलीवरी और मरीजों के आपरेशन तक मोमबत्तियों की रोशनी में करने पड़ते हैं। अब नौबत यहां तक आ पहुंची है कि लोग घरों को रोशन करने के लिए जनरेटर तक खरीदने लगे हैं। तिब्बत की सीमा से सटे जनजातीय इलाके स्पीति घाटी में पिछले कई सालों से विद्युत आपूर्ति सुचारु दुरुस्त नहीं है।
यहां बिजली आने के बाद कब चली जाए यह तय नहीं रहता। इस साल के शुरुआत में अब तक स्पीति घाटी में महज 720 घंटे बिजली की आपूर्ति हो पाई है। इस कारण यहां का पर्यटन कारोबार भी चौपट हो चुका है। प्रशासनिक और बैंकों के कामकाज से लेकर हर तरह का बिजनेस पटरी से उतर गया है। सुचारु बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार लाखों दावे करती रही है। लेकिन यहां दिनभर में महज दो घंटे ही बल्ब जल पाते हैं। सरकारी दावों पर अब लोगों का भरोसा भी उठ चुका है।
स्पीति घाटी में अभी दो दर्जन से अधिक परिवारों ने बैंकों से कर्ज लेकर जनरेटर खरीदे हैं। काजा निवासी नोरबू राम, रमेश, रिगजिन, हिशे और फूंचोग ने बताया कि इस साल के शुरुआत में ही घाटी में बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई थी। स्कूली बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। स्पीति में होटल और इंटरनेट व्यवसाय से जुडे़ सतपाल महाजन, रिषु, तंजिन, अंगदुई ने बताया कि बिना बिजली के पर्यटन कारोबार को करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।

विद्युत परियोजनाओं का फायदा नहीं
केलांग। वर्ष 1986 में करीब आठ करोड़ की लागत से दो मेगावाट की रोंगटोेंग बिजली परियोजना बनी थी। लेकिन इसका फायदा लोगों नहीं मिल पाया। परियोजना में मशीनों के रख रखाव और अन्य कार्यों पर अब तक अरबों रुपये खर्च हो चुके हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने लाहौल दौरे के दौरान इन खर्चों पर अंकुश लगाने की नसीहत भी दी है। वहीं लिंगटी परियोजना के हांफने से दिक्कतें और बढ़ गई हैं। भावानगर में तैनात स्पीति का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे इंजीनियर जनरेशन डीपी सिंह ने कहा कि किन्नौर से स्पीति घाटी के लिए बिजली की लाइन बिछाई जा रही है। परियोजना का कार्य पूरा होने बाद स्पीति में बिजली आपूर्ति दुरुस्त हो जाएगी।

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