
ताबो (लाहौल-स्पीति)। शीत मरुस्थल स्पीति घाटी अपने अंदर कई रहस्य और अद्भुत खजाने को छिपाए हुए है। सैलानी बरबस इन रहस्यों को जानने यहां खींचे चले आते हैं। यहां के प्राचीन गोंपाओं यानी मठों में बौद्ध धर्म की विभिन्न परंपराओं के दीदार होते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मुश्किल मौसम में भी हर साल यहां हजारों की संख्या में पर्यटक दौड़े आते हैं।
स्पीति घाटी में लगभग सौ गोंपा हैं। ताबो गोंपा सबसे प्रमुख है। इसके अलावा पिन वैली का खुंगरी गोंपा, काजा का तिनचू और डंखर गोंपा भी प्रसिद्ध है। इनमें से सबसे प्राचीन है ताबो गोंपा। इसकी स्थापना वर्ष 996 ईस्वी में लजाबो रिगजिन ने की थी। पारंपरिक बौद्धिक शैली में बने इस गोंपा में स्थापित प्राचीन मूर्तियां और अद्भुत चित्रकारी में प्राचीन बौद्ध धर्म की झलक देखने को मिलती है।
यहां कई गुरुओं तथा लामाओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। ताबो गोंपा बौद्ध तांत्रिक क्रियाओं के लिए दुनिया में प्रसिद्ध है। तांत्रिक गुरू गारमू की प्रतिमा भी ताबो गोंपा में स्थापित है। बौद्ध कथाओं के अनुसार गारमू ने तंत्र विद्या के बल पर ताबो से करीब नौ किलोमीटर ऊपर पहाड़ी पर पानी निकाल दिया था। इसीलिए तांत्रिक गुरू की प्रतिमा को ताबो गोंपा में विशेष स्थान दिया गया है।
तांत्रिक गुरुओं को स्थानीय भाषा में चाउ भी कहा जाता है। इसके अलावा ताबो गोंपा नि:संतान दंपतियों की मन्नत पूरी करता है। कहा जाता है कि मंजू गोशाल की मूर्ति को उठाकर गोंपा की परिक्रमा करने से नि:संतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। गोंपा के गाइड नग्याल के अनुसार प्राचीन बौद्धिक परंपराओं का रहस्य जानने के लिए प्रतिवर्ष देश-विदेश के हजारों पर्यटक स्पीति घाटी का रुख करते हैं।
