
पिथौरागढ़। आजादी के बाद शुक्रवार को लोकतांत्रिक भारत में नागरिकों के लिए यह दूसरी आजादी है। देश की शीर्ष अदालत ने लोगों को यह अहसास कराया है। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निगेटिव वोट के जरिए मतदाताओं को राइट टू रिजेक्ट (प्रत्याशी को नकारने का हक) दे दिया है। अदालत ने ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) में इनमें से कोई नहीं का विकल्प देने के आदेश केंद्रीय चुनाव आयोग को दिए हैं। अब ईवीएम में इनमें से कोई नहीं का भी विकल्प होगा। यानि प्रत्याशियों के अलावा एक विकल्प बढ़ जाएगा। लोग इसे लोकतंत्र की जीत के रूप में देख रहे हैं। इस फैसले को बुद्धिजीवी और आम लोग सियासत को सुधारने में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
