दो जिलों को संभालता एक अधिकारी

डीडीहाट। सपना उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश बनाने का, लेकिन इस सपने को सच में तब्दील करने के लिए राज्य बनने के बाद कदम उठाए नहीं गए। सड़कों की तस्वीर ठीक नहीं हैै। अन्य बुनियादी ढांचा भी बेहतर नहीं हो सका है। हाल यह है कि खुद पर्यटन विभाग स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। पिथौरागढ़ में दो साल से विभागीय मुखिया का पद खाली है। तस्वीर इस कदर धुंधली है कि दो जिलों में एक पर्यटन अधिकारी है और वह भी प्रभारी।
पर्यटन को बढ़ाने के बुनियादी नुस्खों का भी पालन यहां हो नहीं रहा है। पिथौरागढ़ जिले के पर्यटन कार्यालय की तस्वीर खस्ता है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी की कुर्सी करीब दो साल से खाली है और यहां का जिम्मा चंपावत जिले के प्रभारी पर्यटन अधिकारी के पास है। इसके अलावा दूसरी कुर्सियां भी खाली हैं। सिर्फ वरिष्ठ सहायक के सहारे ये कार्यालय संचालित हो रहा है। दोनों जिलों में विभाग के पास एक भी वाहन नहीं है।
पिथौरागढ़ जिले में सात पद स्वीकृत है, लेकिन एक बाबू के सहारे पूरी व्यवस्था चल रही है। इसके अलावा दो कर्मी आउटर्सोसिंग से हैं। ड्राइवर का पद सृजित है लेकिन तैनाती नहीं। वहीं चंपावत में प्रभारी पर्यटन अधिकारी के अलावा एक बाबू, एक डाटा इंट्री आपरेटर और एक पीआरडी कर्मी से काम चल रहा है।

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