भाजपा में निशंक तो कांग्रेस में हरीश चढेंगे ‘केदारनाथ’

केंद्रीय मंत्री हरीश रावत की केदारनाथ पैदल जाने की अनुमित मांगने संबंधी चिट्ठी के अब राजनीतिक मायने ढूढ़े जा रहे हैं। यही कारण है कि सरकार और शासन इस मसले पर काफी गंभीर है।

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी इस चिट्ठी पर सीधे कोई जवाब देने से बचते नजर आए। सचिवालय में मीडिया के सवालों पर बहुगुणा ने कहा कि भाजपा के पास केदारनाथ पैदल जाने के लिए निशंक हैं तो कांग्रेस के पास हरीश रावत हैं।

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रमेश पोखरियाल निशंक की चुनौती
बहुगुणा ने केदारनाथ पैदल चलने की पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की चुनौती के मद्देनजर यह बात कही। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बहुगुणा ने अनायास ही यह बात नहीं कही है।

राजनीतिक संदेश देने की कोशिश
रावत ने पैदल केदारनाथ जाने की पेशकश करके जिस तरह से राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है, उसी तरह मुख्यमंत्री ने भी बड़ी चालाकी से यह बताने का प्रयास किया है कि भाजपा में निशंक जो कर रहे हैं वही कांग्रेस में हरीश रावत।

मालूम हो कि निशंक की अतिसक्रियता के चलते विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष की रणनीति बुरी तरह फ्लाप हुई और फ्लोर मैनेजमेंट बिगड़ा रहा।

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निशंक को खुद ही सफाई देनी पड़ी
दल नेता और उनके बीच दरार की बात पर निशंक को खुद ही सफाई देनी पड़ी। इसी तरह आए दिन सरकार के नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहें बहुगुणा की कुर्सी हिलाए रखते हैं।

कथित तौर पर इन अफवाहों के पीछे हरीश रावत का नाम रहता है। दरअसल, रावत ने ऐसे समय में केदारनाथ जाने की चिट्ठी लिखी है, जब सरकार के नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं जोरों पर है। यही कारण है कि सरकार और शासन उनकी चिट्ठी के राजनीतिक मायने तलाश रहे हैं।

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राज्य पुनर्निर्माण के लिए पचास वर्ष के विजन पर काम
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि आपदा में राज्य को भारी नुकसान हुआ है। इसके पुनर्निर्माण के लिए अगले पचास साल के विजन पर कार्ययोजना बना कर काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि केदारनाथ यात्रा की तैयारी चल रही है। सरकार का प्रयास है कि एक अक्तूबर से सीमित संख्या में यात्रियों को केदारनाथ जाने दिया जाए। उन्होंने कहा कि हेमकुंड और गंगोत्री में यात्रा शुरू की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा से उत्तराखंड में पर्यटन को भी काफी नुकसान हुआ है।

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