
हल्द्वानी। एक स्टोन क्रशर कंपनी और उसके डायरेक्टर के खिलाफ टीडीएस काटकर सरकार को न देने के मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन हल्द्वानी की कोर्ट ने समन जारी किया है। इस संबंध में इनकम टैक्स कमिश्नर ने कंपनी के खिलाफ परिवाद दायर किया था, जिस पर कोर्ट ने समन जारी किया।
आयकर विभाग के सरकारी वकील आलोक घिल्डियाल ने बताया कि हल्द्वानी स्थित कृष्णा स्टोन क्रशर ने 2012 में साल भर टीडीएस काटा लेकिन सरकार को नहीं दिया। इसकी जानकारी लगते ही एक अक्टूबर 2012 को इनकम टैक्स कमिश्नर टीडीएस हल्द्वानी एके श्रीवास्तव ने कंपनी के खिलाफ आयकर अधिनियम की धारा 276बी के अंतर्गत और कंपनी में टीडीएस का काम देखने वाले डायरेक्टर असीम भटनागर के खिलाफ आयकर अधिनियम की धारा 276बी और 278बी के तहत सिविल जज जूनियर डिवीजन ज्योति बाला की अदालत में परिवाद दायर किया। सोमवार को देहरादून से आए अधिवक्ता आलोक घिल्डियाल ने मामले पर कोर्ट में जिरह की। जिरह के बाद कोर्ट ने कृष्णा स्टोन क्रशर और डायरेक्टर असीम भटनागर के खिलाफ समन जारी किया।
इनसेट
क्या है धारा 276बी और 278बी
धारा 276बी के तहत उस कंपनी या फर्म के खिलाफ कार्रवाई होती है जो कि अपने कर्मचारियों, भत्तों या अन्य तरह की लेनदेन पर टीडीएस तो काट लेती हैं लेकिन सरकार को नहीं देतीं। इसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है। जबकि 278बी उस व्यक्ति के खिलाफ लगती है, जिसे कंपनी या फर्म में टीडीएस का काम देखने के लिए नियुक्त किया गया हो।
इनसेट
कई और लोग हैं निशाने पर
आयकर आयुक्त एके श्रीवास्तव ने बताया कि कंपनी के साफ्टवेयर में टीडीएस से जुड़ी सारी जानकारियां होती हैं। क्योंकि खाता खोलने के साथ ही कंपनी को टिन नंबर दिया जाता है जो कि इनकम टैक्स में रजिस्टर हो जाता है। इसके आधार पर टीडीएस की हर जानकारी कंपनी के सॉफ्टवेयर में दर्ज होती जाती हैं। इसी के जरिए टीडीएस जमा न करने वाले पकड़े जाते हैं। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी और काशीपुर में कई बड़ी फर्मों पर उनकी नजर है, जिन्होंने टीडीएस जमा नहीं किया है।
