अब डीएल बनाना पड़ेगा और भी महंगा

अब ड्राइविंग लाइसेंस बनाना और भी महंगा पड़ सकता है। स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने और रजिस्ट्रेशन करने का कार्य निजी हाथों को देने की कवायद की जा रही है। आरटीओ कर्मचारियों के विरोध के बावजूद अगले चार-पांच माह में योजना को अमलीजामा पहनाने की संभावना जताई जा रही है।

शासन में सोमवार को हुई बैठक में डीएल और रजिस्ट्रेशन का काम निजी कंपनी को देने पर विचार विमर्श किया गया। सूत्रों की मानें तो इसे लेकर खाका तैयार कर लिया गया है, हालांकि आरटीओ कर्मचारी निजीकरण के इस प्रस्ताव को जोरदार विरोध कर रहे हैं।

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उनका कहना है कि अगर लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन का काम उनसे छिन जाएगा तो फिर परिवहन विभाग में वह करेंगे क्या? योजना के तहत डीएल और रजिस्ट्रेशन का कार्य पीपीपी मोड पर देने के बाद संबंधित कंपनी के कर्मचारी ही लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन का शुल्क जमा करेंगे।

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इसके बाद वह अपनी फीस काटकर बाकी की राशि सरकार के खाते में जमा कर देंगे। ऐसे में यह तय है कि डीएल और रजिस्ट्रेशन का शुल्क भी बढ़ जाएगा। आरटीओ दिनेश चंद्र पठोई ने बताया योजना चार-पांच माह में शुरू हो सकती है। शासन स्तर पर पूरा मामला चल रहा है।

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