
नैनबाग (टिहरी)। आपदा के कहर से कराह रहे जौनपुर के परोड़ी गांव की महिलाओं ने गांव की बदहाल पड़ी व्यवस्थाओं को संवारने का काम श्रमदान के माध्यम से शुरू कर दिया है। बिना किसी सरकारी मदद के महिलाओं ने पहले क्षतिग्रस्त रास्तों को चाक-चौबंद किया, फिर गांव के आंगनों का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है।
17 जून की आपदा ने परोड़ी गांव में जमकर कहर बरपाया था। गांव के 112 परिवारों में से 35 परिवार आपदा से प्रभावित हुए थे। 18 आवासीय भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता मुहैया कराई गई है। लेकिन गांव की व्यवस्थाएं आपदा के तीन माह बाद भी पटरी पर नहीं आ पाई थी। कई परिवार अब भी दूसरे घरों में शरण लिए हुए हैं। महिलाओं ने तंगहाल व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने की हिम्मत खुद गांव की महिलाओं ने जुटाई है। महिलाओं ने परोड़ी गदेरे से लेकर गांव तक लगभग 300 मीटर रास्ता तो बनाया ही, अब पंचायती आंगन की मरम्मत भी शुरू कर दी। आशा देवी, बिद्रा देवी, दरथी देवी, सावित्री, रीना और मीना देवी ने बताया कि महिलाओं ने बिना किसी सरकारी मदद के पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है। आंगन निर्माण के लिए महिलाएं एक किमी दूर से खुद ही सिर पर पत्थर भी ढो रहीं हैं। ग्राम प्रधान किसन बधानी का कहना है कि महिलाओं के प्रयास से जल्द ही जनजीवन पटरी पर लौट जाएगा।
