स्कूल पहुंचते ही बेहोश होती हैं छात्राएं

कर्णप्रयाग। राजकीय इंटर कालेज नैनीसैंण में पिछले चार दिन से छात्राओं की अजीबो-गरीब तरीके से तबियत खराब हो रही है। इस समस्या के चलते विद्यालय में पढ़ाई प्रभावित होकर रह गई है। चिकित्सकों की टीम ने विद्यालय पहुंचकर पीड़ित छात्राओं का उपचार किया। सोमवार को विद्यालय में प्रार्थना के बाद सभी छात्र-छात्राएं अपनी कक्षाओं में पहुंचे। इसी दौरान कक्षा 10, 11 और 12 में अध्ययनरत छात्राएं जोर-जोर से रोने और आवाज करने लगी। शिक्षक कुछ समझ पाते, इसी दौरान छात्राओं का पूरा शरीर कांपने लगा। चिल्लाने के दौरान ही वह बेहोश हो गई। इस घटना के बाद स्कूल का माहौल अस्त- व्यस्त हो गया। सोमवार दोपहर को सीएचसी कर्णप्रयाग में तैनात डा. प्रकाश भट्ट के नेतृत्व में चिकित्सकीय दल ने विद्यालय पहुंचकर छात्राओं का उपचार किया।

पूर्व भी हो चुकी ऐसी घटनाएं —

जिला बागेश्वर के जीआईसी छत्यानी में भी बीस दिन पहले 12 छात्राएं बेहोश हो गई थी। जिला चमोली के जीआईसी सिमली में एक वर्ष पूर्व कक्षा 9 से 12 की 20 छात्राएं में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई दिए थे। अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जनपद के विद्यालय में भी पूर्व में इस तरह की घटना हो चुकी है।

इनका कहना है-

शनिवार को विद्यालय प्रबंधन ने छात्राओं की तबियत खराब होने की जानकारी दी। विद्यालय पहुंचने पर देखा तो कई छात्राएं बेहोश थी। सोमवार को भी दोबारा विद्यालय पहुंचे तो प्रार्थना के बाद छात्राओं का रोना, चिल्लाना और बेहोश होने का क्रम चलता रहा।
— सुरेंद्र सिंह/खिलदेव सिंह अभिभावक

समस्या समझ से परे है। कक्षा 9 से 12 की छात्राओं की तबियत खराब हो है। शुरूआती दो दिन नार्मल स्थिति थी, लेकिन शनिवार व सोमवार को स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। अभिभावकों को भी विद्यालय में बुला लिया गया। बीईओ, सीईओ, सीएमओ को भी इस समस्या से अवगत करा दिया गया है।
— डीएस नेगी प्रधानाचार्य जीआईसी नैनीसैंण (कर्णप्रयाग)

छात्राओं को बुखार है। इसके अलावा अन्य कोई शारीरिक परेशानी नहीं है। कुछ छात्राओं में ऐनीमिया के लक्षण महसूस किए गए हैं। कक्षा 10 से 12वीं छात्राएं ही प्रभावित हुई हैं, जो उनके शारीरिक विकास के साथ हार्मोंस में परिर्वतन के चलते भी ऐसा हो सकता है।

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