एक मंच पर दो लोक संस्कृतियों का संगम

पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमखंड मैत्री जनकल्याण सोसायटी के तत्वावधान में पांवटा में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक संध्या में एक मंच पर हिमाचल और उत्तराखंड की लोक संस्कृति का संगम देखने को मिला। लोक कलाकारों की प्रस्तुति पर देर रात तक लोग झूमते रहे।
सांस्कृतिक संध्या को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पांवटा के विधायक चौधरी किरनेश जंग ने कहा कि प्राचीन लोक संस्कृति को संजोए रखना जरूरी है। दो पड़ोसी राज्य हिमाचल और उत्तराखंड के लोगों में एक मंच पर लोक संस्कृति की झलक से आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल भी बनता है। विशिष्ट अतिथि इंडस्ट्रीज सिरमौर के महाप्रबंधक ज्ञान सिंह चौहान ने कहा कि विशुद्ध लोक संस्कृति को बचाने के प्रयास जरूरी हैं। इस मौके पर एसडीएम पांवटा श्रवण मांटा, डीएसपी पांवटा नरवीर सिंह राठौर, डीएसपी नाहन खजाना राम, नप कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह तारी, एसएचओ पांवटा भीष्म ठाकुर, नप उपाध्यक्ष तेजपाल सिंह, हिमखंड संस्था के संरक्षक कुंदन सिंह शास्त्री, कुंज बिहारी जुयाल, कैप्टन पीसी भंडारी, गुमान सिंह वर्मा, अनिता वर्मा, इंदिरा चौहान, प्रेमपाल सिंह, एसआर पुंडीर, नीरज शर्मा, शिव सिंह असवाल, मधुकर शर्मा, मीत सिंह ठाकुर, आशा तोमर, राजेंद्र शर्मा, रामलाल शर्मा, कुलदीप राणा, खेवटा राम कपूर आदि मौजूद थे।

मंगलेश डंगवाल ने बिखेरा सुरीली आवाज का जादू
पांवटा साहिब (सिरमौर)। उत्तराखंड के लोक कलाकार मंगलेश डंगवाल के गढ़वाली गीतों पर दर्शक खूब झूमें। शनिवार देर शाम को पांवटा में रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मीडिया प्रायोजक ‘अमर उजाला’ रहा। मंगलेश डंगवाल ने ‘शिव जागर मैगा महादेव’ से आगाज किया। इसके बाद ‘सेरा गौ कि बांद माया रे’, ‘हे सर्वा मेरी सर्वा’, ‘मेरी छौदांड़ी सजि धजिक’, ‘नेगी की चेली भारी अलबेला’, ‘सिल्की बांद’, ‘छिलकु जनौ ठुमका लगौ मेरी बसंती’, ‘जागड़ा महासू देव का’ में गीत प्रस्तुत किए। इस दौरान गढ़वाल के पारंपरिक ढोल दमाऊंके साथ टीम के सामूहिक नृत्य कर खूब वाहवाही लूटी। मंगलेश के उत्तराखंड आपदा में मृतक लोगों एवं बचाव कार्य में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजली के रूप में प्रस्तुत दर्द भरे गीत ‘हे केदारनाथ भोले भंडारी क्य हवैगी हमसे भूल बिसरवु चुप किले जटा धारी’ ने सबको भावविभोर कर दिया।

संगीता ढोढ़ियाल, रेशाम शाह ने बांधा समा
पांवटा साहिब(सिरमौर)। पांवटा में हिमखंड मैत्री जनकल्याण सोसायटी की सांस्कृतिक संध्या में कार्यक्रम में उत्तराखंड की गायिका संगीता ढोंडियाल और रेशमा शाह के आवाज का जादू भीदर्शकों के सिर चढ़ कर बोला। संगीता के गीत ‘हाय रेणुका री झील मां’ और जौनसारी गीत ‘जामुना को पानी में’ दर्शक खूब झूमते दिखे। रेशमा शाह ने ‘माता रेणुका परशुराम’ से शुरुआत की। इसके बाद ‘ले भूजी जाली चूड़ा’ और ‘बिडरुं ना मामिए मेरे जानों से खूब तालियां बटौरी।’

एक मंच पर कार्यक्रम अच्छा अनुभव : राजटा
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल के उभरते लोक कलाकार अतुल राजटा और सुरेश शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड के कलाकारों के साथ एक मंच पर कार्यक्रम देने से उत्साहित हैं। हिमखंड मैत्री जनकल्याण सोसायटी पांवटा और मीडिया प्रायोजक ‘अमर उजाला’ के आभारी रहेंगे। दो पड़ोसी राज्यों की लोक संस्कृति को एक मंच पर दिखाने का प्रयास सराहनीय है। गुरु की नगरी में होने वाली इस तरह की सांस्कृतिक संध्या अच्छी पहल है।

पर्वतीय संस्कृति को बचाना जरूरी : मंगलेश
पांवटा साहिब (सिरमौर)। उत्तराखंड के लोक गायक मंगलेश डंगवाल ने कहा कि लोक संस्कृति हमें आपस में जोड़ती है। लोक कलाकारों को क्षेत्रीय भाषा, वेशभूषा और वाद्य यंत्रों को गीत संगीत के माध्यम से जिंदा रखना होगा। पड़ोसी राज्य हिमाचल में गुरु की नगरी में दूसरी बार कार्यक्रम प्रस्तुति दी है। कलाकार ने मीडिया प्रायोजक ‘अमर उजाला’, हिमखंड संस्था, स्थानीय प्रशासन और श्रोताओं का आभार जताया। आपदा के समय उत्तराखंड को अच्छे पड़ोसी और बढ़े भाई का फर्ज अदा करने पर हिमाचल का आभार जताया।

टेंशन नहीं लेने का… गीत पर झूमे युवा
गायक अतुल राजटा और सुरेश शर्मा का जलवा
उभरते युवा कलाकारों की टीम ने मचाया धमाल
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल के उभरते युवा कलाकार अतुल राजटा और सुरेश शर्मा ने दमदार गीत प्रस्तुत किए। गीतों पर युवा दर्शक खूब नाटी करते नजर आए। पंडाल के समीप झूमते दर्शकों को पुलिस जवानों ने काफी मसक्कत कर संभाला। सांस्कृतिक संध्या के दौरान प्रो. ओम प्रकाश राही ने मंच संचालन किया। अतुल राजटा ने ‘लोबिए गीत’ से आगाज किया। इसके बाद ‘डॉली फूलों’, ‘भादरी’, ‘अधिया मंगाई जा रहे मेरे पीणे खे’, ‘गांव दे पाके, काले बाशों’, ‘नंद राणी और चेईं चेईं’ गीतों से दर्शकों को खूब नचाया। सुरेश शर्मा ने ‘डॉली झूमें, ड्राइवरा हार्न बजाई जा’, ‘तांदा कोरुं तो प्यारो’, ‘हाए मीरा राणिए’, ‘रेणुका माईए और ‘रिम छिम रिम छिम बरसी बरखा’ गीतों पर युवाओं के पांव खूब थिरके। चिराग ज्योति ने जोओठा धाल तथा डोनी चौहान ने ‘तेरे दिवाने’, ‘सेलिधार’, ‘महासूरा टिल्ली’ और ‘नंबरदार’ गीत प्रस्तुत किए। विशिष्ट अतिथि महाप्रबंधक उद्योग विभाग सिरमौर ज्ञान सिंह चौहान भी खुद को नाचने से रोक नहीं सके।

सिरमौर के कलाकारों ने भी दिखाया दमखम
पांवटा साहिब (सिरमौर)। स्थानीय उभरते कलाकारों को मंच से मौका मिला। ‘अमर उजाला’ के बैनर तले गुरू की नगरी पांवटा में उत्तराखंड और हिमाचल लोक संस्कृति की झलक एक मंच पर दिखी ही। साथ ही हिमाचल यूथ ब्रिगेड टीम के पंजाबी भंगड़े ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। पारंपरिक हारूल और गीतों का प्रस्तुत किया गया। सिरमौरी वेशभूषा में सजे कलाकारों ने हारूल प्रस्तुति से खूब तालियां बटौरी। कफोटा क्षेत्र के कलाकार राजेंद्र शर्मा राजू और नैन सिंह की टीम ने बेहतर प्रस्तुति दी। हारूल के माध्यम से हाटी संस्कृति और इतिहास को प्राचीन समय से संजोया गया है। टीम ने ‘नेगी नतराम’, ‘ठुंढू-कमरऊ’, ‘पेरुटिया’, ‘बीणा वनसाण’ और ‘ऐसी मोजूरे जूगी जोमाना रे… गुरखिए हारूलों’ से खूब समां बांधा। कार्तिक ठाकुर के गीत, महक शर्मा के डांस से सबका मन मोह लिया। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पांवटा की टीम ने वंदेमातरम प्रस्तुत किया। कन्या स्कूल की टीम ने बेहतरीन पहाड़ी लोकगीत पर सामूहिक नाटी से दर्शकों की तालियां बटौरी। पांवटा कॉलेज के दीपक ने पंजाबी और पहाड़ी गीत प्रस्तुत किए। बेहतरीन प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया।

Related posts