
कुल्लू। सेब सीजन में हुई करोड़ों रुपये की कमाई इस बार अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव
में रंग भरेगी। फलों के उत्पादन के लिए विख्यात कुल्लू घाटी में इस बार सेब का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। खासकर दशहरा उत्सव में आने वाले सैकड़ों व्यापारियों के लिए यह खुशखबरी है। देशभर के विभिन्न कोनों से यहां सैकड़ों लोग कारोबार करने आते हैं।
जिले में इस बार जहां सेब का अब तक का सबसे ज्यादा रिकार्ड उत्पादन हुआ है, वहीं फलों में पलम, नाशपाती और अनार की भी अच्छी पैदावार से बागवानों को अच्छी खासी कमाई हुई है। किसानों ने लहसुन और मटर की फसल से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। लिहाजा दशहरा उत्सव के दौरान खरीददारी भी अधिक होने की उम्मीद है।
सेब की शानदार पैदावार और मंडी में उम्दा भाव मिलने से जिले के छोटे से छोटे सेब उत्पादक ने भी डबल कमाई की है। ऐसे में इसका असर अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में देखने को मिलेगा। जिले में हुए सेब के रिकार्ड उत्पादन की भनक लगते ही देशभर के कारोबारियों की नजरें अब दशहरा उत्सव के कारोबार पर टिकी है। मात्र हफ्तेभर चलने वाले इस दशहरा उत्सव में अरबों रुपये का कारोबार होता है।
खास बात यह है कि उत्सव का पूरा कारोबार यहां के फलों के उत्पादन पर निर्भर रहता है। इसमें सेब की फसल प्रमुख है। जिले में 78 फीसदी लोग सेब की फसल से जुड़े हैं। कुछ सालों से घाटी में सेब की फसल में कमी आने से इसका असर दशहरा उत्सव में साफ तौर से देखा गया है। ऐसे में इस बार बंपर पैदावार होने से उत्सव में जहां कारोबारियों की भीड़ बढ़ने की उम्मीद है, वहीं लोगों की भागीदारी में भी इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
जिला ज्ञान-विज्ञान समिति के अध्यक्ष दौलत भारती ने कहा कि दशहरा उत्सव का कारोबार अमूमन घाटी के फलों के उत्पादन पर निर्भर रहता है। इस बार जिले में सेब सहित तमाम फलों का उत्पादन शानदार रहा है। इसका असर दशहरा उत्सव में भी देखने कोे मिलेगा। उत्सव में व्यापारियों के साथ लोगों की भागीदारी भी बढ़ेगी और लोगों के पास पैसा होने से खरीददारी बेहतर होगी।
1.10 करोड़ सेब की पेटियां होने की उम्मीद
कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति एपीएमसी के चेयरमैन यूपेंद्रकांत मिश्रा और सचिव प्रकाश कश्यप ने कहा कि जिले में इस साल 1.10 करोड़ सेब की पेटियों के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। 16 सितंबर तक जिले में 76,18,991 सेब पेटियां बाहर भेजी जा चुकी थीं।
