
श्रीनगर। तीन माह पूर्व आई भीषण बाढ़ तथा पैठाणी में बादल फटने की घटना से हुए नुकसान से उबरने के लिए जिला प्रशासन के पास बजट ही नहीं है। लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, जल निगम, जल संस्थान सहित कई विभागों के करोड़ों के आगणन जिलाधिकारी के पास लंबित हैं, जिन्हें धनराशि न होने के कारण स्वीकृत नहीं किया जा सका है।
केंद्र से राज्य सरकार के पास आपदा मद में भले ही सात करोड़ रुपये आए हों, लेकिन जून-जुलाई माह में आई आपदा की मार से कई गांव और शहरवासी आज भी जूझ रहे हैं। क्षेत्र में पेयजल लाइनों, सड़क, पुश्ता निर्माण, बाउंड्री वॉल, मलबा सफाई, झूला पुल निर्माण, ट्रॉली लगाने जैसे जरूरी कार्य रुके हुए हैं। कोल्ठा क्षेत्र के तीन दर्जन गांवों को तो 70 किमी. की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, वहीं देवलगढ़ स्थित राजराजेश्वरी मंदिर का पुश्ता निर्माण न होने से यह खतरे की जद में है। अधिकारियों की मानें, तो जिले के लिए आपदा मद में आई सात करोड़ की धनराशि खर्च हो चुकी है, जबकि डीएम कार्यालय में विभिन्न विभागों के 36 करोड़ के आगणन आपदा मद में होने वाले कार्यों के लिए लटके हुए हैं। तीन माह गुजर जाने के बाद भी चमधार-देवलगढ़-बुघाणी मोटर मार्ग सहित क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक मार्गों की बदहाली हैं। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य इंदु उनियाल ने आपदा के बाद से क्षेत्र में कोई सुधारीकरण कार्य न होने पर रोष जताया।
कोट
– हमारे पास जो धनराशि थी, वह खर्च की जा चुकी है। कब तक बजट पहुंचेगा, यह नहीं कहा जा सकता, लेकिन लंबित आगणन तभी स्वीकृत किए जा सकते हैं, जब हमारे पास बजट आएगा। – चंद्रेश कुमार यादव, जिलाधिकारी पौड़ी।
