
नई दिल्ली। डीजल की खरीद-फरोख्त में तीनों नगर निगम को प्रति माह करीब दो करोड़ रुपये का चूना लग रहा है। वाहनों में डीजल भरने की केंद्रीकृत व्यवस्था होने के चलते तीनों नगर निगम को इस नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। डीजल कंपनी एक जगह पर डीजल उपलब्ध कराने के नाम पर बाजार दर से आठ रुपये प्रति लीटर ज्यादा कीमत वसूल रही है। इसका खुलासा सोमवार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सदन की बैठक में हुआ।
सदन की बैठक में साफ-सफाई पर चर्चा के दौरान कई पार्षदों ने कूड़ा उठाने वाले वाहनों को डीजल उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा उठाया। इसी बीच विपक्ष के नेता मुकेश गोयल ने ध्यान आकर्षित किया कि अधिकारियों की लापरवाही के चलते डीजल खरीदने में तीनों नगर निगम को प्रति माह करीब दो करोड़ रुपये का चूना लग रहा है। क्योंकि वह डीजल की मुख्यालय स्तर पर खरीद कर रही है। इस कारण डीजल कंपनी उनसे बाजार भाव से प्रति लीटर आठ रुपये अधिक राशि लेती है। इस मुद्दे पर पूरे सदन ने कड़ी नाराजगी जताई।
उठाए गए मुद्दे की सच्चाई जानने के लिए मेयर आजाद सिंह ने आयुक्त पीके गुप्ता से जवाब-तलब किया। आयुक्त ने माना किया वह आठ रुपये प्रति लीटर अधिक राशि दी जा रही है। लेकिन अब डीजल खरीदने की व्यवस्था जोनल स्तर पर की जाएगी।
