
नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी का भाजपा के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी के रूप में उन्नयन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साह से लबरेज कर दिया है और वर्ष 2014 में होने जा रहे आम चुनाव में विजय की उम्मीद जगा दी है। विश्लेषक हालांकि कुछ और ही नजरिया रखते हैं। उनकी नजर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भौगोलिक विस्तार की विवशताएं और उदार व समन्वय वाली छवि वाले नेता को पसंद करने वाले भारतीयों की अच्छी तादाद के कारण गुजरात के मुख्यमंत्री की गांधीनगर से नई दिल्ली की डगर में ढेर सारी चुनौतियां हैं।
वरिष्ठ पत्रकार और टिप्पणीकार एस. निहाल सिंह ने कहा कि खास तौर से जब उन्हें भाजपा के वैचारिक स्रोत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से आशीर्वाद जब मिल चुका था तब मोदी के उन्नयन से कोई हैरत नहीं हुई है।
निहाल सिंह ने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा, ‘‘मुझे उनके चुनावी समर का विजेता होने पर संदेह है। मुझे उनके पूरे देश में स्वीकार किए जाने पर संदेह है। भारत जैसे व्यापक जातीय विविधिता वाले देश में लोग ‘एक समन्वित छवि वाले नेता’ का समर्थन करते हैं।’’
निहाल सिंह ने कहा, ‘‘आखिर किस तरह वे खुद को एक अलग मोदी के रूप में दिखा सकेंगे? वे कथनी बदल सकते हैं…समस्या विश्वसनीयता के साथ खड़ी होगी।’’
उन्होंने कहा कि मोदी के उन्नयन के पीछे भाजपा नेताओं के उस चिंतन का भी प्रभाव है जिसमें नेताओं का मानना है कि इस समय पार्टी मुस्लिम मतों का एक बड़ा हिस्सा नहीं हथिया सकेगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि मोदी अभी भी धु्रवीकरण करने वाली छवि रखते हैं और उनकी व्यापक राजनीतिक स्वीकार्यता नहीं है।
मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा, ‘‘एक उदार लोकतंत्र और सामान्य परिस्थितियों में चरमपंथी ताकतें कभी भी विजयी नहीं हो सकती। कुछ दुर्लभ स्थितियों को छोड़कर लोकतंत्र उदारपंथ की ओर बढ़ता है।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा को पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों तक अपना फैसला टालना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि भाजपा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के अलावा उत्तरपूर्व के कई राज्यों में कमजोर है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में यह बड़ी ताकत तो नहीं ही है, राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में भी यह तीसरे पायदान पर है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर अश्विनी के. राय ने कहा कि मोदी के आलोचकों ने लगातार आलोचना कर उनका प्रोफाइल बढ़ाया है।
राय ने कहा, ‘‘उनके आलोचकों ने उन्हें हीरो बना दिया।’’
उन्होंने एक न्यूज एजेंसी सेे कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि भाजपा का उन्हें प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनाना न्यायसंगत ठहरता है। मोदी के पास राजनीतिक कौशल है।’’
सर्वेक्षण में उभर कर आया है कि प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में मोदी सबसे ज्यादा पसंद किए गए हैं।
एबीपी न्यूज-नेल्सन के एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि 60 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिभागियों ने मोदी के प्रदर्शन को ‘बेहतर/बहुत बेहतर’ माना है और वे प्रधानमंत्री की पसंद के रूप में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी और मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुकाबले आगे हैं।
सीएनएन-आईबीएन के सर्वेक्षण में कहा गया है कि मोदी सभी राजनीतिक पार्टियों में प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में सबसे पसंदीदा नेता हैं।
भाजपा का अनुमान है कि मोदी के नेतृत्व में अगले आम चुनाव में भाजपा 30 प्रतिशत मत झटकने में कामयाब रहेगी।
