चीनी विवि से डिग्री लेने वाले छात्रों को मिली राहत

नई दिल्ली। चीन के जिआंग झी विश्वविद्यालय से एमबीबीएस करने वाले दो छात्रों को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने छात्रों को पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को दिया है ताकि दोनों छात्र प्रैक्टिस शुरू करने के लिए अपना पंजीकरण करवा सके।
जस्टिस वीके जैन ने सुशील कुमार व मिलिंद बबनराव जदे की याचिका को स्वीकार करते हुए छात्रों द्वारा पात्रता प्रमाण पत्र आवेदन पर तीन माह के भीतर पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने और इसके दो सप्ताह के भीतर स्क्रीनिंग के नतीजे घोषित करने का निर्देश दिया है। याची सुशील कुमार व मिलिंद बबनराव जदे ने जुलाई अगस्त 2005 में चीन की जिआंग झी यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने दोनों छात्रों को पंजीकरण के लिए होने वाले स्क्रीनिंग टैस्ट में बैठने की अनुमति नहीं दी थी क्योंकि विदेशी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले छात्रों ने पात्रता प्रमाण पत्र नहीं लिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर छात्र भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई की अन्य शर्तें पूरी करता है लेकिन एमसीआई से पात्रता प्रमाण पत्र नहीं लेता तो केवल इस गलती के मद्देनजर उसे प्रमाण पत्र जारी न करना बेहद कठोर कदम होगा। अहम है कि एमसीआई ने अगस्त 2012 में दोनों छात्रों को यह कहते हुए पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने से इंकार कर दिया था कि प्रमाण पत्र नियमों के तहत उन्हें विदेशी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले पात्रता प्रमाण पत्र लेना चाहिए था। एमसीआई का यह भी तर्क था कि छात्रों ने जिस यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया वह चीनी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त 30 यूनिवर्सिटी की सूची में शामिल नहीं है।

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