
पौड़ी। शहर के कंडोलिया स्थित डीआईजी कार्यालय में फिर सन्नाटा पसर गया है। गढ़वाल रेंज बनते ही इस कार्यालय की रौनक फिर गायब हो गई है। डीआईजी साहब भी यहां महीने में कभी-कभार एक या दो दिन के लिए आ पा रहे हैं।
पौड़ी में पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय 1976 में स्थापित हुआ था। यूपी शासनकाल में इस कार्यालय में काफी चहल-पहल रहती थी। राज्य बनने के बाद अन्य मंडलीय कार्यालयों की तरह इसके भी दिन गहराने शुरू हो गए। इस कार्यालय के अधिकारियों ने पौड़ी के बजाय देहरादून स्थित कैंप कार्यालय बैठने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। मुख्य कार्यालय होने के बाद भी यह कैंप कार्यालय जैसा बन गया। इसको देखते हुए वर्ष 2012 में प्रदेश शासन द्वारा गढ़वाल रेंज दो रेंज में विभाजित कर दिया। इसमें देहरादून, हरिद्वार, उत्तरकाशी समेत तीन जिलों को मिलाकर देहरादून रेंज बनाया गया। पौड़ी, चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग चार जिलों को मिलाकर पौड़ी रेंज बनाया गया था।
पौड़ी चार पर्वतीय जिलों का अलग रेंज बनने से पौड़ी स्थित इस डीआईजी कार्यालय के दिन बहुरने लगे। इस रेंज में नियुक्त पुलिस उपमहानिरीक्षक भी ज्यादातर यहीं बैठ रहे थे। जिससे इस कार्यालय में चहल पहल बढ़ने लगी थी। लेकिन पिछले मई माह में प्रदेश शासन द्वारा फिर दोनों रेंजों को मिलाकर पूरे गढ़वाल मंडल को एक पुलिस रेंज बना दिया। जिससे फिर इस कार्यालय के दिन फिरने लगे हैं।
गढ़वाल रेंज होने के बाद यहां तीन लिपिक समेत चार कर्मचारी देहरादून स्थानांतरित हो गए हैं। वर्तमान में यहां एक लिपिक समेत नौ कर्मचारी रह गए हैं। अपराध की ज्यादातर घटनाएं देहरादून और हरिद्वार में होने के कारण पुलिस उपमहानिरीक्षक इस कार्यालय में कम ही आ पाते हैं। ऐसे इस कार्यालय में ज्यादातर सन्नाटा छाया रहता है।
पर्वतीय जिलों की अपेक्षा देहरादून, हरिद्वार जिलों में अपराध का दबाव काफी ज्यादा है। मैदानी क्षेत्रों ज्यादा घटनाएं होती है। मैदानी क्षेत्रों में व्यस्त रहना पड़ता है। जिससे पौड़ी बैठने के लिए समय नहीं मिल पाता है। इस बार आपदा के कारण भी पौड़ी में बैठने के लिए कम समय मिला। – अमित सिन्हा, पुलिस उपमहानिरीक्षक गढ़वाल रेंज पौड़ी गढ़वाल
