67 किमी दूर चल रहा हिंडोलाखाल का पालिटेक्निक कालेज

नई टिहरी। देवप्रयाग ब्लाक मुख्यालय के हिंडोलाखाल के नाम पर दो साल पहले खोले गए पालिटेक्निक कालेज का क्षेत्र के लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पाया है। यह कालेज यहां से 67 किलोमीटर दूर श्रीनगर में पहले से चल रहे पालिटेक्निक कालेज के भवन में ही चल रहा है। स्थिति यह है कि इसके भवन निर्माण के लिए गांव वाले भूमि दान देने की भी घोषणा कर चुके हैं इसके बावजूद अधिकारियों ने भूमि का निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठाई है।
छह मार्च 2011 को हिंडोलाखाल के लिए लोगों की लंबे समय से चल रही मांग के अनुरूप पालिटेक्निक की स्वीकृति प्रदान की गई थी। जिस पर ग्रामीणों ने कालेज के अवस्थापना विकास के लिए निशुल्क भूमि देने का प्रस्ताव शासन को भेजकर भवन निर्माण होने तक हिंडोलाखाल में ही खाली पड़े कन्या उच्च प्राथमिक स्कूल के चार क्लासरूम में कालेज संचालित करने का सुझाव दिया था, लेकिन प्राविधिक शिक्षा निदेशालय ने आनन-फानन में बिना पद सृजित किए ही श्रीनगर पालिटेक्निक कालेज में ही कक्षाएं शुरू करा दी। सामाजिक कार्यकर्ता रघुवीर सिंह चौहान और यशपाल पंवार ने कहना है कि यदि हिंडोलाखाल में पालिटेक्निक बन जाता तो क्षेत्रवासियों को लाभ मिलता। हिंडोलाखाल में पालिटेक्निक खोलने की घोषणा को महज छलावा बताया।

कालेज में मैकेनिकल ट्रेड पढ़ाया जा रहा है, इसके लिए उपकरणों का होना जरूरी है। अभी उपकरण नहीं है इसलिए कक्षाएं श्रीनगर में संचालित की जा रही है। अगले सत्र तक उपकरणों की खरीद के साथ ही वित्त विभाग से पदों की स्वीकृति भी मिल जाएगी। जिसके बाद हिंडोलाखाल में कालेज शुरू किया जाएगा। भूमि चयन को लेकर कार्यवाही गतिमान है।
-देशराज सिंह संयुक्त निदेशक प्राविधिक शिक्षा निदेशालय।

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