23 सालों से खेतों में नहीं पहुंचा पानी

खराहल (कुल्लू)। सिंचाई योजनाओं की अनदेखी से किसानों को हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। घाटी के दर्जनों गांवों के किसानों के खेतों में समय पर सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में खेतों में लहलहा रही फसलें सूखने लगी हैं। आईपीएच महकमे ने 1989-90 में नेऊली-थरमाण सिंचाई योजना का निर्माण किया करवाया था। लेकिन तेईस साल बाद भी किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच सका है।
सिंचाई योजना की पाईपें जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं। इलाके में पक्की कूहलों का निर्माण नहीं हुआ है। परिणामस्वरूप किसान अपने खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे। कृषक कई बार इस बारे आईपीएच विभाग से आग्रह कर चुके हैं लेकिन आश्वासन के सिवाय दो दशकों से कुछ नहीं मिला। किसान निशु महंत, अमित, नितिन, संजीव, जोगराज, रामनाथ, हर्ष ठाकुर, केहर सिंह, यशपाल राणा, रूप सिंह और वार्ड पंच पूर्ण चंद आदि का कहना है कि 23 साल पहले उठाऊ सिंचाई योजना का निर्माण हुआ था। खेद इस बात का है कि सिंचाई योजना की कूहलें जगह-जगह से क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। इस कारण खेतों तक पूरा पानी नहीं पहुंच पा रहा। अधूरी सिंचाई से फसलें भी सूखे की चपेट में आ रही हैं।
किसानों ने स्थानीय विधायक से मांग की है कि कूहलों के निर्माण के लिए धन मुहैया करवाया जाए। कूहलों के अभाव और तकनीकी स्तर पर कई खामियों होने से इलाके में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा। कागजों में थरमाण-नेऊली उठाऊ सिंचाई योजना के तहत 98.4 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा रही है। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता विवेक हाजरी ने कहा कि पक्की कूहलों की रिपेयर के लिए करीब 11.70 लाख का एस्टिमेट बनाया है। इसे जल्द ही सरकार को भेज दिया जाएगा। बजट का प्रावधान होते ही कार्य आरंभ करवा दिया जाएगा।

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