
हल्द्वानी। अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) देने रविवार को कई आवेदक एमबीपीजी कालेज पहुंचे, जबकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद करीब 5 दिन पहले ही परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। परीक्षा देने आए अधिकांश आवेदक हल्द्वानी से बाहर के थे। स्थानीय अखबार न पढ़ने के कारण इन्हें परीक्षा स्थगित होने की सूचना नहीं मिली और अन्य स्रोतों से आवेदकों को शिक्षा विभाग सूचना नहीं भेज पाया था। एक दंपति गुजरात से और एक महिला मध्यप्रदेश से परीक्षा देने पहुंची थीं। इसके अलावा यूपी के कई शहरों से आई महिलाएं भी थीं।
गुजरात में नौकरी करने वाले सुरेश महर मूलरूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी की रविवार को टीईटी थी। इसका प्रवेशपत्र भी उनके पास गुजरात पहुंच गया था। श्री महर ने बताया कि प्रवेशपत्र मिलने के बाद उन्होंने अपना और पत्नी का रिजर्वेशन करा लिया था। डेढ़ साल के बेटे को लेकर दोनों शनिवार शाम यहां पहुंचे और सिडकुल में नौकरी करने वाले अपने दोस्त रोहित के यहां रुके। रविवार को जब सुरेश पत्नी को परीक्षा दिलाने बेटे के साथ कालेज पहुंचे तो पता चला कि परीक्षा रद हो गई। श्री महर ने बताया कि सरकारी लापरवाही की वजह से उनकी पांच दिन की छुट्टी तो गई ही, साथ ही करीब चार हजार रुपये आने-जाने में खर्च हो गए। इसके साथ 48 घंटे का सफर अलग से।
इसी तरह मध्यप्रदेश सागर की महिला ने बताया कि वह दो दिन पहले आ गई थीं इसके बावजूद उन्हें परीक्षा स्थगित होने की जानकारी नहीं मिल पाई। महिला का हल्द्वानी में मायका है वह अपने बच्चों को छोड़कर परीक्षा देने आई हैं। मेरठ से आई अनीता अग्रवाल का कहना था कि विभाग को इसकी लिखित सूचना देनी चाहिए थी। लखनऊ में एक निजी कंपनी में काम करने वाले रोहित का कहना था कि विभागीय लापरवाही के कारण उनके कई जरूरी काम छूट गए हैं।
