खाल तस्कर सूरजपाल गिरफ्तार

नई दिल्ली। बाघ और तेंदुए का शिकार करने के बाद उसके खालों की तस्करी करने वाले संसार चंद के जेल जाने के बाद क्राइम ब्रांच ने सबसे बड़े तस्कर सूरजपाल को आदर्श नगर से गिरफ्तार किया है। सूरजपाल जिम कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क में बाघों और तेंदुए की शिकार करवाने के बाद खालों और हड्डी की तस्करी करता था। पुलिस ने इसके दो अन्य सहयोगी को भी गिरफ्तार किया है।
जानवरों की खालों की तस्करी करने वाले संसार चंद के बाद पुलिस के लिए यह सबसे बड़ी कामयाबी है। सूरजपाल करीब 20 साल से यह धंधा कर रहा था। जबकि दूसरा सूरजभान संसार चंद के लिए काम करता था। इनके पास से पुलिस को बाघ की खोपड़ी, हड्डियां, नाखून और दांत के अलावा एक कार और 52.70 लाख रुपये मिले हैं।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम को खालों की तस्करी करने वाले सूरजभान के दिल्ली में आने की सूचना मिली। पुलिस की टीम ने इस सूचना पर चांदगीराम अखाड़ा के पास टाटा मानजा कार को रोककर उसमें सवार दो लोगों को दबोच लिया। जिनकी पहचान सोनीपत हरियाणा निवासी सूरजभान और नरेश के रूप में हुई। पुलिस को कार की डिग्गी से 18 किलो बाघ की खोपड़ी, हड्डियां, नाखून और दांत मिले।
पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के नगीना में रहने वाले एक शख्स से सारा सामान खरीदा है। पकड़े गए तस्करों ने बताया कि वे यह काम आदर्श नगर में रहने वाले सूरजपाल के लिए करते हैं। उसी ने बाघ की खालों और अन्य सामान के लिए छह लाख रुपये एडवांस दिये थे। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर सूरजपाल को गिरफ्तार कर लिया। उसके घर से पुलिस को 50 लाख रुपये और बाघ के नाखून मिले हैं।
जांच में पता चला कि सूरजपाल उर्फ चाचा मूलत: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर का रहने वाला है। यह देश का सबसे बड़ा जानवरों के खालों का तस्कर है। इसके नाम का खुलासा संसार चंद ने भी पूछताछ के दौरान किया था।

40 से 50 लोग जानवरों का शिकार कर तस्करों को देते हैं खाल
सूरजपाल ने पूछताछ में खुलासा किया है कि सोनीपत के रथधाना और अन्य गांव के करीब 40 से 50 लोग उसके लिए काम करते हैं। सभी सूरजपाल के लिए जानवरों का शिकार कर उसके खाल, हड्डी, नाखून और दांत का सप्लाई करते हैं। शिकारी जिम कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क में पालतू जानवरों में जहरीला पदार्थ बांध देते हैं और फिर उसे बाघ और तेंदुए के पास छोड़ देते हैं। पालतू जानवर का शिकार करने के बाद बाघ और तेंदुआ छह से दस किलोमीटर के भीतर ही मर जाते हैं। उसके बाद शिकारी उसके खाल और अन्य चीज निकाल लेते हैं।

अन्तरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों में बिकती है खाल
सूरजभान ने पूछताछ में बताया कि वह सूरजपाल को बाघ की छह खाल मुहैया करवा चुका है। जिसके एवज में सूरजपाल ने उसे 20 लाख रुपये एडवांस दिए थे। इन खालों को उसने नागपुर से लिया था। एक खाल को उसने साढ़े तीन लाख में खरीदी थी। उसने बताया कि इन खालों की अंतरराष्ट्रीय बाजार खासकर चीन और पूर्व एशिया में काफी मांग है और वहां कई करोड़ रुपये में खाल बिकती हैं।

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