
मंडी। प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से शुक्रवार को शहर के ऐतिहासिक सेरी मंच पर वीर सैनिक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। पूर्व सैनिकों ने विभिन्न लड़ाइयों में प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्तरा के पिता गिरधारी लाल बत्तरा और माता कमल कांता बत्तरा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। फाउंडेशन की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया।
वीर सैनिक महोत्सव में सबसे पहले अमर ज्योति प्रज्ज्वलित कर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। समारोह में भारत-पाक युद्ध में शहीद वीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कैप्टन प्रेम सिंह, कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्तरा के अलावा अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
शहीद कैप्टन विक्रम बत्तरा के पिता गिरधारी लाल ने कहा कि आपदा में ही वीर सैनिकों की याद आती है। उससे पूर्व इस वर्ग की अनदेखी ही होती है। देश की सीमा और देश के आंतरिक सुरक्षा को जब खतरा पैदा होता है तो सभी को वीर सैनिक याद आते हैं। सैनिक समाज का सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य बनता है। जो देश अपने शहीदों को भूल जाते हैं, वह अपना अस्तित्व खो बैठते हैं। उन्हें अपने बेटे कैप्टन विक्रम बत्तरा की शहादत पर गर्व है। कारगिल युद्ध भारतीय सैनिक नहीं जीतते तो पाकिस्तान कश्मीर पर कब्जा कर लेता।
कारगिल युद्ध में कमांडिंग आफिसर रहे सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह ठाकुर ने विक्रम बत्तरा की शहादत को याद करते हुए कहा कि युद्ध के दौरान वह कैप्टन विक्रम बत्तरा के साथ युद्ध भूमि में थे। विक्रम बत्तरा ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए वीरगति पाई। 1965 में शहीद लेफ्टिनेंट कैप्टन प्रेम सिंह गुलेरिया ने युद्ध के दौरान दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। उन्हें वीर चक्र मिला। उन्होंने खेद प्रकट किया कि देश में जिस तरह से सैनिकों को सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल रहा है।
प्रेमजी फाउंडेशन के संयोजक लक्ष्मेंद्र सिंह गुलेरिया ने महोत्सव में आए अतिथियों का स्वागत किया। प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण समिति के अध्यक्ष सूबेदार प्रकाश चंद ने कहा कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों की बेटियों को आरक्षण और धार्मिक स्थलों पर सैनिकों को दर्शन के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस मौके पर स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व मंत्री गौरी प्रसाद, साहित्यकार केके नूतन, कैप्टन योगेश जम्वाल, राजेंद्र सिंह, बालक राम, विशन दास आदि मौजूद रहे।
