देखन में छोटे लगें घाव करें गंभीर

नई दिल्ली। दिल्ली विधान सभा चुनाव का काउंट डाउन शुरू हो गया है। राजधानी में अभी तक अमूमन कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला रहा है। मगर इस बार छोटी पार्टियां दोनों बड़ी पार्टियों का खेल बिगाड़ सकती हैं।
विधानसभा चुनावों में पहली बार चुनावी राजनीति का हिस्सा बनी आम आदमी पार्टी का प्रचार अभियान जहां जोरों पर है, वहीं पिछले तीन चुनावों में बहुजन समाज पार्टी का मत प्रतिशत लगातार बढ़ा है। ऐसे में दूसरी छोटी पार्टियों के बीच मत विभाजन बड़े दलों के लिए बड़ी मुसीबत हो सकती है। खासकर उन सीटों पर, जहां हार-जीत का अंतर एक हजार के भीतर है।
बसपा के बाद नंबर राम विलास पासवान की लोक जन शक्ति पार्टी का है। पिछले चुनाव में मटिया महल से शोएब इकलाब पार्टी के विधायक हैं, जबकि बुराड़ी, चांदनी चौक, बल्लीमारान व बवाना समेत छह सीटों पर पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। वहीं, 2003 की एक सीट की जगह शरद पवार की एनसीपी को बेशक पिछले चुनाव में एक भी नहीं मिली, लेकिन किराड़ी और बदरपुर में मजबूत दावेदारी पेश कर पार्टी ने छह दूसरी सीटों पर भी बेहतर प्रदर्शन किया था। इसके अलावा नेशनल लोक दल, शिरोमणि अकाली दल, राष्ट्रीय जनता दल व सपा का भी दखल रहा है।

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छोटी पार्टियां, जिनको मिलता वोट
एलजेपी, एनसीपी, आरजेडी, एनएलडी, एसएडी, जेडी (यू)
सपा का ज्यादा असर उन इलाकों में रहता है, जहां पूर्वांचली मतदाताओं की तादात ज्यादा है।
इस बार सपा और जेडी (यू) का जोर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर होगी।
दोनों पार्टियों ने इसकी कोशिश भी शुरू कर दी है।

अब तक का रिकॉर्ड
पार्टी 2008 2003 1998
एनसीपी 5.93 4.94 –
एलजेपी 2.29 —-
एसएडी(एम) 37.53 – 2.61
आरजेडी 3.80 1.03 1.82
जेडी(यू) .30 .48 –
सपा .91 1.11 1.32
निर्दलीय 3.98 5.13 8.98

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