
भल्याणी (कुल्लू)। फलों की घाटी कुल्लू में सेब के बगीचों में रोपे पौधे फिर से अंकुरित होने लगे हैं। जिले के बागवानों की दिक्कतें ऐसे में बढ़ गई हैं। पौधों में समय से पूर्व पतझड़ रोग की बीमारी लगने के चलते पौधा नंगा हो चुका है। पौध अभी तक सुप्त अवस्था में नहीं है। ऐसे में पौध के स्पर फिर से अंकुरित होने लगे हैं।
जिले में रोपे गए कई सेब के पौधों पर फिर से डोडियां बननी शुरू हो चुकी हैं। पौधों की ऐसी स्थिति देख बागवान हैरान परेशान हैं। मणिकर्ण घाटी के बगीचों में लगे सेब के पौधों में यह समस्या अधिक है। घाटी में ओलावृष्टि ने भी पत्तों को नुकसान पहुंचाया था। बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा समय से पूर्व पतझड़ होने से हो रहा है। अभी पौध सुप्त अवस्था में नहीं है। पौध का अंकुरित होना स्वाभाविक है।
मणिकर्ण घाटी के चौंग निवासी जगमोहन सिंह और जरी निवासी जय किशन ठाकुर ने बताया कि पौधों में यह समस्या अधिक है। बागवानी निदेशक बीसी राणा ने बताया कि इसका अगले साल की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। फिलहाल इसका कोई उपचार नहीं है। हालांकि अब फल नहीं उगेगा। ऐसे में पौध के स्पर कमजोर पड़ जाएंगे। बागवानी विभाग के विषय विशेषज्ञ के पद पर तैनात डा. टेक चंद ठाकुर ने बताया कि उन्हें बागवानों से ऐसी शिकायतें मिली हैं। ठाकुर ने बागवानों को सलाह दी है कि भविष्य में बागवान विभाग द्वारा जारी स्प्रे शेड्यूल के अनुसार ही करें। इससे उनके बागों में समय से पूर्व पतझड़ नहीं होगा न ही पौधा अंकुरित होगा।
