
सोमेश्वर। शहीद दिवस के अवसर पर बौरारो घाटी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया गया। प्रात: स्कूली बच्चों ने प्रभातफेरी निकाली। शहीद स्मारक चनौदा में हुए कार्यक्रम वक्ताओं ने कहा कि शहीदों के कार्यों से प्रेरणा लेकर उनके पद चिह्नों पर चलें। यही शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
प्रात: स्कूली बच्चों ने चनौदा बाजार से होते हुए शहीद स्मारक तक प्रभातफेरी निकाली। रैली में महात्मा गांधी इंटर कालेज, कन्या हाईस्कूल, शिशु सदन के बच्चों ने भाग लिया। शहीद स्मारक पर दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देवेंद्र सनवाल ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से ही देश आजाद हुआ। शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए सभी को मिल जुलकर काम करना होगा।
क्षेत्रीय विधायक अजय टम्टा ने कहा कि बौरारो घाटी का स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी इंटर कालेज चनौदा में कक्ष निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपये देने की घोषणा की। जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन राम आर्य ने शहीद स्मारक के सौंदर्यीकरण के लिए 60 हजार रुपये देने की घोषणा की। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के अध्यक्ष महिपाल भाकुनी ने कार्यक्रम को भव्य रूप देने पर जोर दिया। संचालन करते हुए ललित भाकुनी ने अस्पताल के उच्चीकरण, तहसील में उपकोषागार, एसडीएम की स्थायी तैनाती, चनौदा इंटर कालेज में विज्ञान वर्ग की स्वीकृति समेत अन्य समस्याएं रखीं। पूर्व प्रधानाचार्य नारायण सिंह कैड़ा, कृष्ण सिंह बिष्ट, मंजू तिवारी, गांधी आश्रम के मंत्री हेम चंद्र पंत, कुंवर भाकुनी आदि ने विचार रखे। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित मोहनी देवी, कौशल्या देवी, बचुली देवी, पूर्व विधायक राम प्रसाद टम्टा, तहसीलदार नारायण सिंह जीना, राजेंद्र पाल, मित्रा सिंह, कुंवर सिंह बोरा, पंकज कांडपाल, एसओ अरुण कुमार वर्मा, भुवन खाती, रेखा आर्या, बब्लू अल्मियां, हरीश भाकुनी, बालम भाकुनी, बीईओ केके आर्या, जयंत सिंह भाकुनी, मुन्ना बोरा आदि मौजूद थे।
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छह स्वतंत्रता सेनानी जेल में हुए थे शहीद
अंग्रेजों ने 42 आंदोलनकारियों को जेल भेज दिया था
सोमेश्वर। बौरारो घाटी का स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान रहा है। दो सितंबर 1942 को अंग्रेजों ने क्षेत्र से 42 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया और सख्त यातनाएं दीं। इनमें से छह आंदोलनकारियों त्रिलोक सिंह पांगती, उदे सिंह पधान, रतन सिंह कबडोला, बाग सिंह दोसाद, किशन सिंह और विशन सिंह बोरा की जेल में ही मौत हो गई। अंग्रेजों द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ की गई बर्बरता की याद में चनौदा में पिछले दो दशक से शहीद दिवस समारोह आयोजित कर स्वतंत्रता आंदोलन को शहीदों को याद किया जाता है। 1929 में महात्मा गांधी ने भी क्षेत्र में एक पखवाड़े प्रवास किया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सचिव कुंवर भाकुनी ने बताया कि शहीदों की याद में 1980 में चनौदा में शहीद स्मारक बनाया गया। जिसमें शहीदों के नाम अंकित हैं। 1985 से चनौदा में प्रतिवर्ष शहीद दिवस मनाया जाता है।
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शहीदों के जीवन वृत्त से जनता को कराएंगे अवगत
सोमेश्वर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के अध्यक्ष महिपाल भाकुनी ने बताया कि बौरारो घाटी के स्वतंत्रता सेनानियों की याद में शहीद स्मारक भवन को संग्रहालय के रूप दिया जाएगा। भवन में क्षेत्र के शहीदों की फोटो, जीवन वृत्त की जानकारी अंकित की जाएगी, ताकि क्षेत्र के लोग शहीदों के जीवन से परिचत हो सकें।
