
खराहल (कुल्लू)। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बरसात बागवानों के लिए मुसीबत बन गई है। समय पर सेब का तुड़ान न होने से बागवानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। पहले ही बारिश से सेब कालेपन का शिकार हो चुका है, अब ड्रापिंग की समस्या बढ़ गई है। हालांकि अब मौसम साफ होने से घाटी में सेब का तुड़ाने जोरों से शुरू हो चुका है। लेकिन कुछ दिन पहले बारिश के खलल से पक्का हुआ सेब झड़ने लगा था। सेब के गिरने से वह दागी हो रहा था तथा इसके चलते दागी सेब को मंडियों में सही दाम भी नहीं मिल रहे थे।
सेब की फसल को पहले ही कालेपन तथा पक्षियों ने काफी नुकसान पहुंचाया है। अब रही-सही कसर ड्रापिंग ने पूरी कर दी है। मंडियों में बागवानों को मन माफिक दाम नहीं मिल रहे। सेब की ड्रापिंग से बागवानों में हड़कंप मचा हुआ है। बागवानों को ड्रापिंग का सेब स्थानीय मंडियों में सस्ते दामों पर बेचना पड़ रहा है। घाटी के बागवान झाबे राम ठाकुर, जोग राज ठाकुर, भुवनेश्वर, योगराज, अखिल राणा, सुरेश कुमार, कर्मचंद, वीर सिंह भंडारी और केहर सिंह ने बताया कि उनके बगीचों में अब सेब की बेतहाशा ड्रापिंग हुई है। पेड़ों से गिरे हुए फलों को एकत्रित कर स्थानीय मंडियों में कम रेट पर बेचना पड़ रहा है। हालांकि घाटी में 75 फीसदी सेब का सीजन खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है।
बजौरा में तैनात बागवानी अनुसंधान केंद्र के सह निदेशक डा. जयंत कुमार ने कहा कि अधिक बारिश से यह समस्या पैदा हुई है। बगीचों में तैयार सेब को समय पर नहीं तोड़ा गया तो ड्रॉपिंग होना स्वाभाविक है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खुलने पर सेब का तुड़ान समय पर करना चाहिए।
