स्कूलों को हाईटेक करने की योजना चौपट

भल्याणी (कुल्लू)। सरकार के माध्यम से स्कूलों को वितरित कंप्यूटर डिब्बों में धूल फांक रहे हैं। कहीं टीचर तो कहीं नेटवर्किंग न होने से योजना हाईटेक नहीं हो पा रही। ऐसे में स्कूलों को वितरित करोड़ों रुपयों के कंप्यूटर महज शोपीस बनकर रह गए हैं। हाई स्कूलों में तो कंप्यूटरों के डिब्बों पर तो चार इंच तक धूल की परत जम चुकी है। सीसे स्कूलों में भी स्थिति संतोषजनक नहीं हैं।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के सभी हाई स्कूलों तथा दुर्गम इलाकों के सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में योजना एक तरह से फेल हो गई है। सीसे स्कूलों में कंप्यूटर सिस्टम को जोड़ने वाली नेटवर्किंग सुविधा न होने से स्कूलों में तैनात मास्टर भी महज बच्चों को कीबोर्ड और माउस के बारे में ही कंप्यूटर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
जिले के 65 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में आईसीटी लैब भी स्थापित नहीं हो पाई है। लैब न होने से स्कूलो में अध्ययनरत हजारा बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा के बारे में जानकारी नहीं मिल रही। इतना ही नहीं स्कूलों में प्रोजेक्टर भी नहीं लग पाए हैं। जिले की 50 उच्च पाठशालाओं को सर्व शिक्षा अभियान के तहत आवंटित कंप्यूटर अभी तक स्कूलों के बंद कमरों में पड़े डिब्बों से बाहर नहीं निकल पाए हैं। ऐसे में देश और दुनिया में शिक्षा तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र मे अग्रणी रहने का दावा ठोंकने वाले शिक्षा महकमे और सरकार की पोल खुद व खुद खुलकर रह जाती है। अभिभावकों ने सरकार और विभाग से जल्द कंप्यूटर सिस्टम को शुरू करवाने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों को गुगल सर्च तक का ज्ञान नहीं है। ऐसे में उनके बच्चों का भविष्य कैसे संवरेगा।

विभाग से किया है पत्राचार
स्कूलों में कंप्यूटर एजूकेशन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। हाई स्कूलों में जहां आईटी अध्यापकों की तैनाती न होने से यह समस्या आई है वहीं सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इस बारे में विभाग को पत्राचारकर अवगत करवाते आए हैं।
जगदीश चंद उच्चशिक्षा उपनिदेशक कुल्लू

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