
उत्तरकाशी। सेब खरीद पर गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) की व्यवस्था धड़ाम हो गई है। भंडारण के लिए जगह नहीं होने, पैकिंग के पेटियां कम पड़ने से निगम ने सेब खरीद में हाथ खड़े कर दिए हैं। काश्तकार पेटियां नहीं मिलने पर कंडियों, बोरियों में सेब भरकर निगम के खरीद केंद्रों के गोदामों तक पहुंचा रहे हैं। कई किसानों ने निगम को भंडारण के लिए नि:शुल्क टिनशेड दिए हैं और कई देने को तैयार हैं। बावजूद निगम सेब खरीद मामले में सुस्त पड़ा है। हर्षिल में दो गोदाम भरने पर तीन दिन से सेब खरीद बंद है। इससे सेब काश्तकार नाराज हैं। पांच हजार मीट्रिक टन सेब उत्पादन वाले अपर भागीरथी घाटी के हर्षिल व सुक्की क्षेत्र के आठ गांवों में अभी तक निगम तीस मीट्रिक टन ही सेब खरीद सका है।
हर्षिल में उद्यान विभाग के हाल एवं पंचायत भवन के फर्श पर ही सेब का भंडारण करने से जगह की कमी पड़ने लगी है। निगम अपने खाली पड़े पर्यटन आवास गृह, इंटर कालेज के छात्रावास में सेब रखने को तैयार नहीं है। इससे काश्तकारों द्वारा तुड़ान किया सेब बागीचों में ही पड़ा है। हर्षिल के काश्तकार अर्ली, मनवरी, जोनाथन, विनौनी, गोल्डन डेलीसेस, पौली नाइजर प्रजाति के सेब बड़ी संख्या में निगम के खरीद केंद्रों में पहुंचा रहे हैं। सुक्की में तो लोगों ने बगीचों में बने अपने गोदाम तथा नीचे एचसीसी कंपनी के टिनशेड मुफ्त में निगम को सौंप दिए हैं। अकेले इस गांव में करीब 250 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। गांव के काश्तकार पूरे सेब के लिए नि:शुल्क भंडारण सुविधा उपलब्ध कराने को तैयार हैं।
सेब खरीद में तेजी लाए निगम
उत्तरकाशी। हर्षिल के सेब काश्तकार डा. नागेंद्र रावत, मुखबा के खुशहाल सिंह, धराली के जय भगवान, सुक्की के मोहन सिंह का कहना है कि गोदाम हम उपलब्ध करा देंगे, किंतु निगम को खरीद में तेजी लाने के साथ ही खरीद की अवधि बढ़ानी चाहिए। बिना पेटी के बागीचों से सेब खरीद केंद्र तक पहुंचाने में समस्या आ रही है।
कोट
हमने सेब की खरीद बंद नहीं की है। हर्षिल, धराली क्षेत्र में गोदामों के लिए लोग 10 हजार रुपये तक किराया मांग रहे हैं। जीएम के साथ बैठक में जनप्रतिनिधियों ने नि:शुल्क गोदाम उपलब्ध कराने का वायदा किया था। गोदाम भरने पर सेब कहां रखेंगे। जहां गोदाम उपलब्ध हैं, सेब की खरीद जारी है। अब हमारे सामने गोदामों की सुरक्षा तथा गंगोत्री हाईवे बंद होने से सेब मंडियों तक पहुंचाने की समस्या है। कई प्रजातियों के सेब दस-पंद्रह दिन में खराब हो जाएंगे। – एपी जोशी, आरएम गढ़वाल मंडल विकास निगम
