स्क्रब टायफस के लिए नहीं कोई वैक्सीन

शिमला। स्क्रब टायफस को नियंत्रण में करने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। लिहाजा, इस बीमारी पर काबू पाना मुमकिन नहीं। क्या ऐसे ही हर साल बीमारी से लोग मरते रहेंगे? स्वास्थ्य महकमे ने साफ कह दिया है कि इस बीमारी से केवल सतर्कता से बचा जा सकता है। ऐसी कोई वैक्सीन नहीं है, जिससे बीमारी से बचा जा सके। हालांकि , शुरुआती लक्षण में ही मरीज जागरूक हो जाए तो दस से पंद्रह रुपये कीमत की दवा से स्वस्थ हो सकता है। अधिकांश लोग इसे सामान्य बुखार मानकर चलते हैं। जब हालत ज्यादा बिगड़ती है तो तभी आईजीएमसी आते हैं। दूसरे जिलों के अस्पतालों में स्क्रब टायफस टेस्ट सुविधा न होना भी मरीजों की संख्या में इजाफा कर रहा है। सरकार हर मर्तबा प्रत्येक अस्पताल में टेस्ट सुविधा देने की बात करती है लेकिन दावे सिर्फ दावे रह जाते हैं। स्वास्थ्य निदेशक डा. कुलभूषण सूद ने कहा कि स्क्रब टायफस की कोई वैक्सीन नहीं है और न ही यह संभव है। केवल सतर्कता से बचा जा सकता है।
उधर, आईजीएमसी अस्पताल में स्क्रब टायफस के मरीजों का आंकड़ा तीन सौ से पार पहुंच चुका है। एक सप्ताह के भीतर चार मरीजों की जान जा चुकी है। इस साल आईजीएमसी में अब तक छह मरीज दम तोड़ चुके हैं। शिमला के चौपाल, ठियोग, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन, सिरमौर जिलों से भी मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि प्रदेश भर से स्क्रब टायफस के मरीज आ रहे हैं। इनका यहां निशुल्क टेस्ट हो रहा है। इसकी दवा भी काफी सस्ती है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई कमी नहीं रखी जा रही।

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