‘नवाज शरीफ के इरादों पर बराबर पानी फिरता रहेगा’

‘नवाज शरीफ के इरादों पर बराबर पानी फिरता रहेगा’

नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सत्ता में आने के बाद पहली बार राष्ट्र के नाम संबोधन में आतंकवाद और गरीबी मिटाने, आॢथक विकास के उपाय करने और पडोसियों से अच्छे संबंध बनाने जैसे विंदुओं के लिए नहीं बल्कि कश्मीर को मुद्दा बताने की वजह से वाही-वाही हो रही है। शरीफ ने 11 मई को हुए आम चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री चुने जाने पर पिछले सप्ताह पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया।

उनके इस संबोधन पर पूरी दुनिया की नजर थी कि आखिर आतंकवाद के पोषक और अब उसी पोषण नीति के कारण आए दिन विस्फोटों से दहलने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की मंशा अपने कार्यकाल में देश को किस दिशा में ले जाने की है। शरीफ ने बार बार कहा है कि वह सभी पडोसियों खासकर भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं लेकिन भारतीय सीमा पर पाकिस्तानी फौज बराबर युद्धविराम का उल्लंघन कर रही है।

इससे लगता है कि पाकिस्तानी फौज के सामने शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार घुटने टेक रही है और यदि यही स्थिति रही और वह सेना के सामने अपना वजन बढाने में असमर्थ रहे तो बहुत संभव है कि फिर कोई जनरल पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की तरह ही उनकी कुर्सी के लिए खतरा बन सकते हैं और एक बार फिर चुनी हुई सरकार को तख्ता पलट का सामना करना पडता है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि सचमुच शरीफ भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं तो उन्हें सेना पर नियंत्रण रखना होगा और खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना के बीच के तालमेल को खत्म करना होगा। यह दोनों जब तक मिलकर काम करते रहेंगे, शरीफ के इरादों पर बराबर पानी फिरता रहेगा और उन्हें जताना पडेगा कि वह कश्मीर समस्या का हल चाहते हैं और भारत के साथ सचमुच अच्छे रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह पडोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहते है और राष्ट्र की गरीबी को मिटाने के लिए भ्रष्टाचार को रोकने और चोरी तथा सरकारी संपत्ति को चूना लगाने वाले कारनामों पर अंकुश लगाकर देश को नई दिशा की तरफ बढाना चाहते हैं।

उन्होंने गरीबी से लडने-आतंकवाद को समाप्त करने. आॢथक स्थिति सुधारने विजली संकट को समाप्त करने और भारत सहित सभी पडोसियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने और कश्मीर को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दा बताने पर बल दिया है। कमाल यह है कि पाकिस्तान में उनके इस संबोधन में उनकी विकास तथा सुधार संबंधी ²ष्टि पर कोई बहस नहीं हो रही है बल्कि उन्होंने कश्मीर का राग अलापा है और इसके लिए उनकी जमकर तारीफ हो रही है। विशेषज्ञ उनकी वाही वाही कर रहे हैं और वहां का सरकारी तथा निजी मीडिया भी उनका इस मुद्दे को उछालने पर गुणगान कर रहा है।

पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डा. नजीर हुसैन ने कहा कि शरीफ के भाषण में भारत के साथ अच्छे संबंधों की बात तो ठीक है लेकिन उन्होंने कश्मीर का मुद्दा उठाकर असाधारण कार्य किया है। पाकिस्तान रेडियो में डा. नजीर अपनी वार्ता में कहते हैं कि लंबे समय बाद शरीफ के भाषण में कश्मीर का मुद्दा आया है और उनकी निगाह में यही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान के लिए अच्छी खबर है और इसके लिए प्रधानमंत्री तारीफ की जानी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषक डा. रसूल बख्श रईस का कहना है कि इसमें संदेह नहीं है कि शरीफ भारत के साथ शांति वार्ता के इच्छुक हैं। वह कहते हैं कि शरीफ अपने पहले कार्यकाल में भी इसी नीति पर काम करते रहे हैं और इस बार भी उनसे उम्मीद यही थी कि वह भारत के साथ अच्छे संबंध बनाएंगे लेकिन कश्मीर पाकिस्तान के लिए हमेशा ही महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।

इस मुद्दे को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उठाकर शरीफ ने गजब की राजनीतिक पहल की है। डा. रसूल का मानना है कि कश्मीर पाकिस्तान के लिए जितना महत्वपूर्ण पहल था, वह आज भी उतना ही जरूरी है। आरंभ से ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज ने कश्मीर मुद्दे पर राजनीति की है और उसके लिए भारत तथा पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है इसलिए उन्होंने कश्मीर मुद्दे को उठाकर अपनी पार्टी की लाइन पर काम किया है और यह प्रधानमंत्री के लिए हर परिस्थिति में आवश्यक मुद्दा है।

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