कहां गईं आपदा में लापता 160 नाबालिग लड़कियां

हल्द्वानी। आपदा में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल से लापता करीब 160 नाबालिग लड़कियाें का पता नहीं लग पा रहा है। दो माह बाद किसी का शव भी बरामद नहीं मिला है। ऐसे में उनके बड़ी संख्या में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जरिए बाहर निकल जाने की आशंका बढ़ गई है। पुलिस और कई एनजीओ लगातार इसकी जांच में जुटे हैं।
पुलिस मुख्यालय के आपदा सेल के आंकड़ों के अनुसार करीब 400 नाबालिग लड़के भी दोनों मंडलों से लापता है। विभिन्न थानों में इनकी गुमशुदगी दर्ज है, लेकिन दो माह बाद उनमें से भी किसी का कुछ पता नहीं लग पाया है। आपदा के वक्त कई नाबालिग बच्चों को नेपाली और बाहर राज्यों के कुछ लोगों के साथ देखा गया था। उनमें से करीब पांच को तो ऋषिकेश से पुलिस ने एनजीओ की मदद से बरामद कर लिया था। इस तरह की शिकायतें आने के बाद राज्य भर के बार्डर एरिया में सघन चेकिंग अभियान भी चलाने के निर्देश आईजी लॉ एंड आर्डर की ओर से दिए गए थे। दोनों मंडलों में स्थित चार एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को सक्रिय कर दिया गया था। कई एनजीओ भी लगातार ह्यूमन ट्रैफिकिंग का पता लगाने में जुटे हैं। ट्रैफिकिंग कर बच्चों को बड़ी संख्या में नेपाल ले जाने की सबसे ज्यादा शिकायतें मिली थी। मुख्यालय की ओर से पिथौरागढ़, ऊधमसिंह नगर और चंपावत को सबसे ज्यादा संवेदनशील बताकर इस बाबत रिपोर्ट भी मांगी थी। एनजीओ एंपावर पीपुल के उत्तराखंड चैप्टर के सीईओ ज्ञानेंद्र कुमार के अनुसार इस तरह की काफी शिकायतें मिली हैं। कुछ बच्चे नेपालियों से ऋषिकेश में रिकवर भी किए गए थे। हमारी भी करीब आठ टीमें इसका पता लगाने में लगी हैं।

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