
शिमला। हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) मामले में शीघ्र ही कई आरोपी नामजद होंगे। एक अगस्त को एफआईआर दर्ज करने के 25 दिन बाद जांच में विजिलेंस को कई अहम सबूत हाथ लगे हैं, जो केस में आरोपियों को नामजद करने के लिए पर्याप्त हैं। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार इस मामले में कुछ दिनों में कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
विजिलेंस ने एचपीसीए के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420, 120बी और पीसी एक्ट की धारा 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। एचपीसीए का कानपुर में जिस पते पर रजिस्ट्रेशन कराया गया था, विजिलेंस जांच में वह पता फर्जी निकला है। इस दौरान रजिस्ट्रेशन में एचपीसीए के कई बड़े पदाधिकारियों के हस्ताक्षर पाए गए हैं। विजिलेंस हस्ताक्षरों को मिलान के लिए लैब भेजने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। वर्ष 2005 से 2011 तक एचपीसीए (हिमालयन प्लेयर्स क्रिकेट एसोसिएशन) का कानपुर में एक कंपनी के तौर पर पंजीकरण करवाया गया था। कानपुर के बाद एचपीसीए के राज्य परिवर्तन करने के संबंध में अप्रैल 2011 में भारत सरकार कारपोरेट कार्य मंत्रालय कार्यालय चंडीगढ़ में कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 18(3) के तहत पंजीकरण करवाया गया था। वर्ष 1990 में चंबा के पते पर जिला मजिस्ट्रेट कम रजिस्ट्रार कांगड़ा के कार्यालय में भी हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन चंबा के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया गया है।
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आज कई पदाधिकारियों से पूछताछ
सोमवार को धर्मशाला स्थित विजिलेंस थाने में एचपीसीए के कई पदाधिकारियों से पूछताछ हो सकती है। अभी तक विजिलेंस विशाल मरवाह, आरएस कपूर, आरपी सिंह सहित कई लोगों से पूछताछ कर अहम दस्तावेज जुटा चुकी है। इस मामले में वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं।
कोट:
जांच में जैसे-जैसे नए तथ्य मिल रहे हैं, विजिलेंस ब्यूरो आगे बढ़ रहा है। दस्तावेजों में तमाम हस्ताक्षरों की भी जांच हो रही है।
-एपी सिंह, डीआईजी, विजिलेंस ब्यूरो शिमला
