
मंडी। नियमितीकरण को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई नई नीति को पीटीए अध्यापक, प्राध्यापक संघ ने ठुकरा दिया है। संघ का कहना है कि इस नीति में आठ वर्ष ग्रांट इन एड और उसके बाद अनुबंध की बात की गई है, जबकि नीति में नियमितीकरण का कोई भी प्रावधान नहीं है। संघ ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पीटीए शिक्षकों को सात वर्षों की सेवा के बदले बिना शर्त नियमितीकरण का तोहफा दिया जाए।
पीटीए संघ के राज्य उपाध्यक्ष रोशन भारती, जिला अध्यक्ष हरि ओम वर्मा, राज्य सहसचिव ललित ठाकुर, मीडिया प्रभारी हरीश ठाकुर ने कहा कि सरकार की ओर से पीटीए शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए जो नीति बनाई गई है, उसमें बहुत खामियां हैं जो पीटीए शिक्षकों को मंजूर नहीं है। जिला अध्यक्ष हरिओम वर्मा ने कहा कि सरकार ने पीटीए शिक्षकों से नियमितीकरण का वायदा किया था, लेकिन नीति में आठ साल तक ग्रांट इन एड और उसके बाद अनुबंध पर रखने की बात कही गई है। इसके अलावा पीटीए शिक्षकों की कई समस्याओं का समाधान आज तक नहीं हुआ है। पीटीए पर तैनात नॉन बीएड लेक्चरर, क्राफ्ट, होम साइंस और संगीत शिक्षकों की 31 दिसंबर 2010 के बाद ग्रांट बंद है। इसके अलावा हटाए गए पीटीए शिक्षकों को भी अभी तक बहाल नहीं किया गया और न ही पीटीए शिक्षकों पर दर्ज केस वापस लिए गए। संघ ने सरकार से मांग की है कि पीटीए शिक्षकों को प्रतिमाह ग्रांट दी जाए। अन्य कर्मचारियों की तर्ज पर सालाना कैजुअल, मेडिकल लीव और अन्य छुट्टियों का वेतन दिया जाए। नियुक्ति तिथि से सात वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके पीटीए शिक्षकों को बिना शर्त नियमित किया जाए। इन सभी मुद्दों को लेकर 28 अगस्त को पीटीए संघ की राज्य स्तरीय बैठक बिलासपुर में होगी। बैठक में आगामी रणनीति के लिए पीटीए शिक्षकों से सुझाव लिए जाएंगे।
