
रोहडू। क्षेत्र के अधिकांश बागीचे मार्सोनिना और आल्टर्नेरिया रोग की चपेट में आ गए हैं। वातावरण में अधिक उमस होने तथा लगातार हो रही वर्षा के कारण रोग तेजी से बढ़ रहा है। इस रोग से बगीचों में समय से पूर्व पतझड़ शुरू हो जाता है। विशेषज्ञों ने बागवानों को बगीचों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।
वातावरण में उमस के कारण सेब बगीचों में आल्टर्नेरिया व मार्सोनिना रोग ने दस्तक दे दी है। कई बगीचों में आल्टर्नेरिया रोग पनप रहा है, तो किसी बगीचे में मार्सोनिना रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। रोग से ग्रस्त पत्तियों की ऊपरी सतह पर गोलाकार गहरे हरे रंग के धब्बे नजर आ रहे हैं। हरे धब्बे पहले भूरे और फिर गहरे भूरे रंग के हो रहे हैं। इसके बाद तेजी से पत्तियों का शेष भाग पीले रंग का हो रहा है। रोग के अधिक पनपने से समय से पूर्व ही पतझड़ शुरू हो जाता है। रोग से ग्रस्त पौधे पर लगे फलों की सतह पर भी भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। बागवान सत्य प्रकाश, सुमेश, यादविंद्र, सुरेश कुमार तथा बिशन सिंह ने बताया कि सेब पौधों में पीले रंग की पत्तियां नजर आ रही हैं। समय से पूर्व पतझड़ होने से आगामी फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई है। पत्ते पीले पड़ने से फल के आकार का विकास रुकने का भी खतरा बना हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ ने माना कि रोग के लक्षण बगीचों में दिखाई देने शुरू हो गए हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतर लक्षण मार्सोनिना रोग के पाए गए हैं। वातावरण में अधिक उमस और लगातार हो रही वर्षा से रोग पनप रहा है। रोग से बचाव के लिए बागवानों को अपने बगीचों को पूरी तरह साफ रखना चाहिए। बागवान पांच सौ ग्राम मैनकोजेब व सौ ग्राम कारबेंडाजिम को दो सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं।
