
रामपुर बुशहर। स्वास्थ्य विभाग ने कानून को ताक पर रख कर गुटखा, खैनी पकड़े जाने के तीन मामलों को न्यायालय के बाहर ही निपटा डाला। जबकि ये मामले एक्ट के सेक्शन 3 (55) में आते हैं और रेगुलेशन 2.3.4 में स्पष्ट किया गया है कि यह मामले किसी भी हाल में कोर्ट के बाहर खत्म नहीं किए जा सकते हैं। इसके चलते ये मामले सीजेएम कोर्ट में पेश करना अनिवार्य थे। जहां आरोपी को छह माह से लेकर उम्र कैद तक की सजा और एक से दस लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। लेकिन, डेजिगनेटिड अधिकारी ने अपने कार्यालय में आरोपियों को जुर्माना कर छोड़ दिया। इसका खुलासा आरटीआई से प्राप्त सूचना से हुआ है।
स्वास्थ्य निदेशालय से मिली सूचना के अनुसार 31 मार्च 2013 को बनारसी दास की दुकान ओल्ड बस अड्डा शिमला, 12 मई 2013 को राकेश कुमार और महेश कुमार की दुकान से गुटखा और खैनी पकड़ी गई थी। लेकिन ये सभी मामले विभाग ने अपने स्तर पर ही निपटा डाले। जबकि खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 की सेक्शन 3(55) के तहत जिसमें निकोटीन और तंबाकू आता है उसे असुरक्षित खाद्य सामग्री की श्रेणी में रखा गया है। एक्ट के रेगुलेशन 2.3.4 में साफ किया गया है कि गुटखा खैनी के पड़के जाने पर आरोपी व्यापारियों के खिलाफ सीजेएम के कोर्ट में केस चलाना तय किया है। लेकिन हैरत की बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग विभाग ने व्यापारियों को यह तक नहीं बताया कि आपका जुर्म किस श्रेणी में आता है और किस नियम के तहत जुर्माना किया जा रहा है।
अधिवक्ता नरेश ठाकुर ने बताया कि जिस वर्ग में सजा और जुर्माने का प्रावधान है, वह केस सीजेएम कोर्ट में पेश करने ही होंगे।
ओएसडी एवं सूचना अधिकारी स्वास्थ्य निदेशालय खाद्य सुरक्षा अधिनियम हिमाचल प्रदेश हंस राज शर्मा ने सूचना देने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा की इस मामले की जांच की जाएगी। अगर किसी प्रकार की कोताई पाई गई तो कड़ी कार्यवाई अमल में लाई जाएगी।
