
रामपुर बुशहर। करीब दो दशक से अपने हक के लिए लड़ रहे नाथपा झाकड़ी प्रोजेक्ट के विस्थापितों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। विस्थापितों को हक दिलाने के लिए प्रदेश उच्च न्यायालय आगे आया है। विस्थापितों ने कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस दिशा में उचित कदम उठाने के आदेश दिए हैं।
झाकड़ी प्रोजेक्ट से 480 परिवार विस्थापित हुए थे। आरएंडआर योजना के तहत प्रबंधन ने प्रत्येक विस्थापित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वायदा किया था, जो पूरा नहीं हुआ। प्रबंधन की ओर से प्रोजेक्ट में 61 परिवारों के सदस्यों को रोजगार दिया गया। जबकि, 55 परिवारों को वैकल्पिक योजना राहत के तौर पर दी गई। बाकी बचे परिवारों को रोजगार के लिए पूछा नहीं गया। तब से लेकर ये विस्थापित परिवार रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। करीब दो दशक बीतने पर जब प्रबंधन रोजगार उपलब्ध करवाने को लेकर गंभीर नहीं हुआ, तो प्रभावित अदालत चले गए। हाल ही में राज्य स्तरीय नाथपा झाकड़ी विस्थापित एवं पुनर्वास समिति के सदस्य भगत राम भारती ने न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी। माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका को मंजूर करते हुए अब प्रदेश सरकार को इस दिशा में उचित कदम उठाने के आदेश दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने भी अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए मामले को उपायुक्त के पास भेजा है। इधर, उपायुक्त ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम रामपुर को भेजा है। एसडीएम दलीप नेगी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस संबंध में प्रोजेक्ट महाप्रबंधक से उचित जवाब मांगा गया है।
झाकड़ी प्रोजेक्ट के विस्थापितों की रामपुर में बैठक हुई। इसमें विस्थापितों ने जनहित याचिका मंजूर करने के लिए हाईकोर्ट का आभार जताया और कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि अब उनको न्याय मिलेगा। बैठक में भगत राम भारती समेत गुड्डू राम, गोपाल सिंह चौहान, शांति नेगी, प्रताप सिंह, शोभा राम, चेतराम, रूप सिंह, कुंदन सिंह, मोहन लाल, लच्छी राम, मानदास, हरिदास, गोकल राम, सवेर दास आदि मौजूद रहे।
