
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने फर्जीवाड़े के आरोप में यूको बैंक के सीनियर मैनेजर व उसके एमबीए डिग्री होल्डर साथी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ऑटो लोन दिलाने के लिए फर्जी कागजातों का सहारा लेते थे। दोनों आरोपी फर्जी कागजातों के आधार पर आधा दर्ज से ज्यादा लोगों को ऑटो लोन दिला चुके थे।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रविन्द्र यादव के अनुसार इंस्पेक्टर मंजीत तोमर को फर्जी कागजातों के आधार पर लोन दिलाने वाले गिरोह की शिकायत मिली। तफ्तीश के बाद इंस्पेक्टर मंजीत तोमर की देखरेख में एसआई लोकेश शर्मा की टीम ने गिरोह के मास्टरमाइंड सुबोध को लक्ष्मी नगर से पकड़ लिया। सुबोध के खुलासे के बाद लक्ष्मी नगर स्थित यूको बैंक के सीनियर मैनेजर रामाचंद्रा दास को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनसे ऑटो लोन लेने वाले सन्नी नामक शख्स को भी गिरफ्तार किया है। सन्नी ने फर्जी एकाउंट खोलकर लोन के चेक को कैश कराने का प्रयास किया था।
ऐसे करते थे ठगी
राजकुमार ने इनोवा कार खरीदने के लिए 11 लाख रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था। इनोवा की कीमत साढ़े तेरह लाख रुपये है। आईटीआर की वजह से राजकुमार को लोन नहीं मिला। राजकुमार ने सुबोध से संपर्क किया। सुबोध ने 25 हजार रुपए लेकर राजकुमार की फर्जी आईटीआर बना दी। सुबोध व मैनेजर ने राजकुमार से मार्जिन मनी के नाम पर 2.5 लाख रुपये जमा कराए । इसके बाद राजकुमार को 11 लाख की बजाय 13.50 लाख रुपये का लोन मिल गया। राजकुमार को पता लगा कि मार्जिन मनी उसके लोन में समायोजित नहीं की गई है। राजकुमार मैनेजर से मिला, परंतु मैनेजर ने उसे सुबोध की बात मानने को कहा। राजकुमार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्जकर तफ्तीश शुरू की थी।
बैंक में काम कर चुका है सुबोध
ठगी के एक मामले में वर्ष 2008 में सुबोध (30) को गिरफ्तार किया गया था। वह एचडीएफसी बैंक में बड़े पद पर काम कर चुका है। रामाचंद्रा (56) और सुबोध उड़ीसा में एक ही गांव के रहने वाले हैं। रामाचंद्रा पर कागजों का वेरीफिकेशन ठीक से नहीं करने और फर्जी वेरीफिकेशन रिपोर्ट बनाने का अरोप लगा है। दोनों के पास से तीन लग्जरी कार समेत अन्य सामान बरामद हुआ है।
