
हरिद्वार। महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि आजम खां के हरिद्वार आगमन से तप साधना की आध्यात्मिक शक्ति का गौरव बढ़ा है। उनका आगमन बताता है कि दूसरे धर्म के कट्टरपंथी नेता भी स्वयं को भगवान के दर्शन से नहीं रोक पाते। दूसरे मजहब का व्यक्ति यदि अपने धर्म के सूफी संतों के यहां न जाकर सनातन पीठ पर नतमस्तक हुआ तो इसमें बुरा ही क्या है।
महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने शनिवार को लखनऊ से भेजे प्रेस बयान में कहा कि अयोध्या में शुरू होने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा में किसी संत को प्रतिबंधित नहीं किया गया है। शिवपाल सिंह यादव ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वे संतों के साथ हैं। जहां तक परिक्रमा को लेकर राजनीति का सवाल है, उसका यूपी सरकार विरोध कर रही है। शिवपाल सिंह यादव मानते हैं कि विहिप का उद्देश्य उत्तर प्रदेश का वातावरण बिगाड़ने का है। यदि केवल संत यात्रा में जाएं तो शिवपाल सिंह यादव स्वयं संताें के साथ परिक्रमा करने जाएंगे।
दक्षिण काली पीठाधीश्वर ने कहा कि उनका अनुष्ठान पूरे श्रावण मास चला। महीने भर हिंदू धर्मालम्बी आते रहे। उन्होंने आजम खां को बुलाया नहीं, वह तो अनुष्ठान की शक्ति का परिणाम है कि आजम खां यहां खिंचे चले आए।
लखनऊ पहुंचे कैलाशानंद
हरिद्वार । दक्षिण काली पीठ पर आजम खां के आगमन से संत राजनीति में उबाल आ गया है। हरिद्वार के सभी संतों ने दो सितंबर को लखनऊ में होने वाले उस संत सम्मेलन के निमंत्रण ठुकरा दिए हैं जो सपा द्वारा लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। एक ओर जहां संत व अखाड़े कैलाशानंद से पूछताछ करने की तैयारियों में जुटे हुए हैं, वहीं हरिद्वार छोड़ कर महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी लखनऊ चले गए हैं।
आजम खां के आने से हरिद्वार का संत जगत बहुत नाराज है। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञान दास एवं महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि सहित अनेक संत नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। संतों का मानना है कि ऐसे समय में जबकि संत समाज द्वारा अयोध्या में परिक्रमा निकाली जा रही है, परिक्रमा को रोकने वाले आजम खां को बुलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। जूना, अग्नि और आवाहन अखाड़ों के श्रीमहंतों ने कैलाशानंद ब्रह्मचारी से गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए जवाब तलब किया है। अखिल भारतीय संत समिति भी नाराज है और आवाज उठा चुकी है।
हरिद्वार के संतों की नाराजगी को अधर में छोड़कर कैलाशानंद ब्रह्मचारी बीती शाम अचानक दिल्ली होते हुए लखनऊ पहुंच गए हैं। उन्होंने मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव आदि से बातचीत की है। कैलाशानंद ब्रह्मचारी 27 अगस्त से दो सितंबर तक लखनऊ के गोमती नगर में भागवत कथा सुना रहे हैं। दो सितंबर को सपा सरकार के इशारे पर बड़ा संत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में हरिद्वार के संतों को ले जाने के लिए कैलाशानंद लगातार वरिष्ठ संतों से संपर्क लगाए हुए हैं। अलबत्ता अभी तक किसी भी संत ने सहमति प्रदान नहीं की है।
परिक्रमा का विरोध
हरिद्वार। समाजवादी पार्टी यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष श्रवण शंखधार ने कहा कि विहिप चौरासी कोस परिक्रमा को लेकर राजनीति कर रही है। वह संतों के नाम का दुरुपयोग कर देश का माहौल बिगाड़ना चाहती है। ऐसा कदापि नहीं होने दिया जाएगा। इस आशय की एक बैठक का आयोजन कार्यालय में किया गया, जिसमें सपा के प्रदेश सचिव डा. राजेंद्र पाराशर, सोनल प्रिंस, लव दत्ता, अंकित यादव आदि ने विचार रखे।
आजम खां के आगमन पर बयानबाजी न करें : नरेंद्र गिरि
हरिद्वार। निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान करने वाला व्यक्ति सच्चा संत होता है। यदि आजम खां हिंदू मठ मंदिर में आते हैं तो इसमें बुरा क्या है। जो संत उनके आगमन का विरोध कर रहे हैं उन्हें जान लेना चाहिए कि प्रयाग कुंभ के समय सभी संतों और अखाड़ों ने कुंभ के प्रभारी मंत्री के रूप में इलाहाबाद की बाघंबरी गद्दी पर आजम खां का अभिनंदन किया था। उनके आने से हिंदू धर्म का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
हरिद्वार से नहीं गया कोई प्रमुख संत
हरिद्वार। विहिप द्वारा आयोजित और यूपी द्वारा प्रतिबंधित चौरासी कोस परिक्रमा में भाग लेने के लिए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के अलावा हरिद्वार से कोई प्रमुख संत नहीं गया है। अधिकांश साधु-संत अपने-अपने आश्रमों और अखाड़ों में बने हुए हैं। अखाड़ा परिषद, अभा संत समिति एवं आश्रम परिषद का कोई संत भी अयोध्या नहीं गया। इस संबंध में स्वामी चिन्मयानंद ने बताया कि अनेक संतों ने आने का आश्वासन दिया था, संभवत: वे रास्ते में हैं और निर्धारित समय पर परिक्रमा में पहुंच जाएंगे। अलबत्ता, हरिद्वार से बहुत अधिक संतों को बुलाया भी नहीं गया था। इस यात्रा में अयोध्या क्षेत्र के संत ही भाग ले रहे हैं।
