मांगा तिरपाल, मिला तमाचा

रुद्रप्रयाग। यह क्या साहब! मांगा तिरपाल था, बदले में मिली तो मार। यह कहां का इंसाफ है। प्रकृति पहले मुझे पहले ही बहुत झटके दे चुकी है। क्या गरीब को हक मांगने का अधिकार नहीं है। शनिवार को ऊखीमठ तहसील में एसडीएम को अपनी व्यथा सुनाते हुए ग्राम पंचायत रांसी के जसपाल सिंह ने यह शब्द कहे। जसपाल का आरोप था कि रहने के लिए तिरपाल मांगने पर पटवारी ने उसको थप्पड़ जड़ दिए।
अगस्त 1998 में रांसी के दारतोली तोक में जसपाल का मकान भूस्खलन की चपेट में आ गया था। हादसे में उसके दो बच्चों, पत्नी की मौत हो गई थी। एक बच्चे को ग्रामीणों ने मलबे से जिंदा बाहर निकाल लिया था। इससे पहले जसपाल तरसाली तोक में अपने पूर्वजों के बनाए भवन में रहता था लेकिन भाईयों में बंटवारा होने पर उसने दारतोली में मकान बनाया। तब से वह रांसी गांव में परिवार के साथ रह रहा है। जसपाल ने बताया कि गांव में आपदा प्रभावितों को तिरपाल मिले लेकिन पंचायत ने बेघर होने के बावजूद उसको तिरपाल तक नहीं दिया गया। चार दिन पूर्व वह तिरपाल के लिए ज्ञापन लेकर ऊखीमठ गया था। शनिवार को गांव लौटने पर राजस्व उप निरीक्षक से तिरपाल मांगने पर उसने चांटा मार दिया। एसडीएम ऊखीमठ राकेश तिवारी ने बताया कि तहसीलदार को जांच के निर्देश हैं। जसपाल को तिरपाल देने के लिए भी कहा गया है।

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