संस्कृत भाषा में रोजगार के द्वार खोलने के प्रयास

कोटद्वार। प्रदेश सरकार ने संस्कृत को द्वितीय राजभाषा के रूप में स्वीकृति दी है। संस्कृत भाषा में अब रोजगार के द्वार खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2013 को संस्कृत वर्ष मनाते हुए प्रदेश के सभी विकास खंड़ों में पांच- पांच संस्कृत विद्यालयों की स्थापना की जा रही है। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के प्रदेश सचिव डा. मोहन चंद्र ने बताया कि आने वाले समय में 50 नए ये संस्कृत विद्यालयों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
श्री ज्वालपादेवी आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में अयोजित कार्यक्रम में अकादमी के उपाध्यक्ष व दिल्ली सरकार के पूर्व सचिव डा. श्रीकृष्ण सेमवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में स्वरचित ज्वालपादेवी को समर्पित संस्कृत गीत गाया। उन्होंने रामायण के रचियता वाल्मीकि तथा वर्तमान में पूर्वोतर भारत में मुस्लिम तथा बौद्ध विद्वानों द्वारा संस्कृत पर किए गए शोध कार्यों पर प्रकाश डाला। कहा कि इसका केवल कर्मकांड की भाषा मानकर दुष्प्रचार न करें, इसे कंप्यूटर की भाषा और यूरोपियन देशों की भाषा स्वीकार करें।
पूर्व निदेशक संस्कृत शिक्षा डा. वाचस्पति मैठाणी व गुरुकुल के प्राचार्य डा. हरि गोपाल शास्त्री ने बताय कि संस्कृत भाषा में अध्यापन व शोध के क्षेत्र में नए-नए अवसर पैदा हो रहे हैं। जिसका लाभ यहां के युवाओं को लेना चाहिए। राजकीय हाईस्कूल पाटीसैण के छात्र अभिषेक भट्ट ने संस्कृत में ओजपूर्ण भाषण देकर सब का मन मोह लिया। इस अवसर पर राजीव गांधी नवोदय विद्यालय संतूधार, ज्वालापा संस्कृत विद्यालय, इंटर कालेज जखेटी और सुराईडांग सतपाली हाईस्कूल के बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर शांति प्रसाद थपलियाल, सत्यप्रकाश थपलियाल, कृष्ण बल्लभ पोखरियाल,योगंबर रावत और पीएस खंतवाल आदि शामिल थे।

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